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बिहार के ये 5 मशहूर फूड, जिन्हें मिला है GI टैग, दुनिया भर में है पहचान | 5 Bihar GI Tag Foods Famous For Their Unique Taste And Identity


बिहार का नाम सुनते ही लिट्टी-चोखा, मखाना और कई पारंपरिक स्वाद याद आ जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिहार की कुछ खाने-पीने की चीजें ऐसी भी हैं, जिन्हें सिर्फ लोगों का प्यार ही नहीं मिला, बल्कि उनकी खास पहचान को GI टैग से भी सम्मानित किया गया है. ये वो स्वाद हैं, जो सालों से लोगों की थाली का हिस्सा बने हुए हैं और अपनी अलग पहचान के लिए जाने जाते हैं. कतरनी चावल की खुशबू हो, मुजफ्फरपुर की शाही लीची की मिठास हो या सिलाव के खाजा का स्वाद, इनकी पहचान बिहार की सीमाओं से बहुत आगे तक पहुंच चुकी है. यही वजह है कि आज ये फूड्स सिर्फ बिहार की शान नहीं, बल्कि देश-दुनिया में राज्य की पहचान भी बन चुके हैं. आइए जानते हैं बिहार के ऐसे 5 मशहूर फूड्स के बारे में, जिन्हें GI टैग मिला है.

बिहार के किन फूड्स को मिला GI टैग-

1. कतरनी चावल-

भागलपुर का कतरनी चावल बिहार के सबसे मशहूर चावलों में गिना जाता है. इसकी सबसे बड़ी पहचान इसकी खुशबू है. पकने के बाद इसकी महक दूर तक महसूस की जा सकती है. स्वाद में भी ये दूसरे चावलों से अलग माना जाता है. साल 2018 में इसे GI टैग मिला था.

2. मघई पान-

मघई पान बिहार की एक खास पहचान है. इसकी खेती मुख्य रूप से नवादा और आसपास के इलाकों में होती है. इसकी पत्तियां नरम होती हैं और स्वाद भी काफी अलग माना जाता है. यही वजह है कि इसे GI टैग का दर्जा दिया गया.

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ये पान अपनी नरम पत्तियों के लिए जाना जाता है. (Image iStock) 

3. शाही लीची-

मुजफ्फरपुर की शाही लीची का नाम देशभर में मशहूर है. ये लीची अपने मीठे स्वाद और रसदार गूदे के लिए जानी जाती है. गर्मियों में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है. बिहार की इस खास लीची को भी GI टैग मिल चुका है.

4. भागलपुरी जरदालु आम-

भागलपुर का जरदालु आम अपनी मिठास और खुशबू के लिए जाना जाता है. आम की ये किस्म काफी खास मानी जाती है और लोगों को इसका स्वाद बहुत पसंद आता है. इसकी अलग पहचान को देखते हुए इसे GI टैग दिया गया.

5. सिलाव का खाजा-

नालंदा जिले के सिलाव का खाजा बिहार की सबसे मशहूर मिठाइयों में से एक है. इसकी कई पतली परतें और कुरकुरा स्वाद इसे खास बनाते हैं. त्योहारों और खास मौकों पर इसकी मांग काफी रहती है. साल 2018 में इसे GI टैग मिला था.

बिहार की विरासत का हिस्सा-

ये फूड्स सिर्फ खाने की चीजें नहीं हैं, बल्कि बिहार की विरासत का हिस्सा हैं. इनकी पहचान आने वाली पीढ़ियों तक बनी रहे, इसलिए GI टैग की भूमिका भी काफी अहम मानी जाती है.

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