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सोना खरीदने का क्या ये सही समय; कीमत कम क्यों हो रही और बढ़ी क्यों थी? जानिए 1950 से अब तक गोल्ड रेट का सफर | is this right time to buy gold Why prices falling why did they rise Trace journey of gold rates from 1950 to the present


सोना यानी गोल्ड भारतीयों के लिए तो धरोहर की तरह है. शादी का समय हो या जीवन का कोई खास पल. हर कोई सोना गिफ्ट कर दूसरे को कीमती होने का एहसास कराता रहा है. मगर हाल के दिनों में सोने ने ऐसी उछाल भरी है कि लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं. भारत में 1950 से 1960 के दशक में सोने की कीमतें काफी स्थिर थीं और प्रति ग्राम सोना 100 से 120 रुपये के बीच रहीं. हालांकि, तब भी इसे खरीदना आसान नहीं था.

1970 से अब तक का सफर

1970 का दशक आते-आते अंतर्राष्ट्रीय तेल संकट और बढ़ती महंगाई कीमतों में पहली बार बड़ा उछाल आया और सोना 900 रुपये को भी पार कर गया. 1980 के दशक में सोना 3,000 रुपये के स्तर को पार कर गया. फिर आया 1990 का दशक. 1991 के आर्थिक संकट और रुपये के अवमूल्यन के कारण कीमतें उछलकर 4,000 के पार हो गया. जो 2005 तक लगभग इसी के आसपास रहा. फिर 2008 के ग्लोबल मंदी के बाद निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने को चुना, जिससे कीमतें 18,000 तक पहुंच गईं.

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2010 के दशक में आर्थिक अस्थिरता के कारण सोने में तेजी जारी रही और यह लगभग 35,000 के स्तर पर पहुंच गया. फिर 2020 में कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और मुद्रास्फीति के दबाव से कीमतें ₹56,200 से बढ़कर ₹70,000 के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गईं. भारत में 24 कैरेट सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम) पहली बार 22 अप्रैल 2025 को 1 लाख रुपये के पार पहुंच गया.  मजबूत वैश्विक संकेतों, भू-राजनीतिक तनावों और सुरक्षित निवेश के रूप में भारी मांग के कारण यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया. फिर इसने डेढ़ लाख का आंकड़ा भी 2026 में पार कर लिया. मगर अब धीरे-धीरे डेढ़ लाख के नीचे आ गया है.

क्यों बढ़ी गोल्ड की कीमत

Bestinvest के जेसन हॉलैंड्स का कहना है कि कई अहम वजहों से सोने की कीमतें तेजी से बढ़ीं. इनमें रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज करना, भारत का बैंक ऑफ इंग्लैंड से लगभग 100 टन सोना वापस अपने देश के वॉल्ट में लाने का फैसला और चीन की तरफ से भारी मात्रा में सोने की खरीद शामिल है. Gold Bullion Partners के चीफ एग्जीक्यूटिव निकोलस वार्ड कहते हैं, ‘भू-राजनीतिक अस्थिरता, बढ़ती महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के मिले-जुले असर के बीच सोने की कीमतें तेजी से बढ़ीं. यह उन निवेशकों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना था जो बढ़ते वैश्विक तनाव से बचाव चाहते थे.’ कीमतों में इस तेजी ने ज्यादा लोगों का ध्यान खींचा कि जल्द ही, आम निवेशक भी इस दौड़ में शामिल हो गए, लेकिन कई लोगों के लिए ऐसा करने का फैसला सिर्फ इस उम्मीद पर आधारित था कि कीमतें और बढ़ेंगी और उन्हें मुनाफा होगा.

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जो लोग सोने की तेजी में देर से शामिल हुए, उन्हें निराशा हुई होगी. मार्च की शुरुआत से सोने की कीमत में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट आई है और अभी यह 1 लाख 49 हजार रुपये के आसपास है. प्रोफेशनल निवेशकों ने इसके संकेत पहले ही भांप लिए थे और अपना पैसा दूसरी एसेट्स में लगा दिया था, वहीं कई रिटेल निवेशक अब नुकसान उठा रहे हैं. 

गोल्ड मतलब इंश्योरेंस पॉलिसी

वेल्थ मैनेजर ‘कैनकॉर्ड’ (Canaccord) के को-चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर टॉम बेकेट कहते हैं, ‘जब सोना $2,000 का था, तो इसे पुराना और उबाऊ माना जाता था, लेकिन $5,500 पर यह दुनिया की सबसे पसंदीदा एसेट बन गया था. उस समय यह साफ था कि सोने की बहुत ज्यादा खरीदारी हो चुकी थी और इसमें बड़ी गिरावट की संभावना थी.’ इतिहास में सोने को हमेशा सबसे सुरक्षित एसेट माना गया है. यह अक्सर इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के लिए एक इंश्योरेंस पॉलिसी की तरह काम करता है क्योंकि अनिश्चितता के समय में इसकी कीमत बढ़ती है, जबकि स्टॉक और बॉन्ड जैसी दूसरी एसेट्स कमजोर पड़ जाती हैं.

अब क्यों गिर रहीं सोने की कीमत

सोने की कीमत अब क्यों गिरी है? एक कारण यह है कि निवेशकों ने भारी मुनाफा कमाने के बाद अपनी होल्डिंग्स बेच दी हैं. इससे एक ‘डोमिनो इफेक्ट’ (एक के बाद एक असर) शुरू हो सकता है क्योंकि बिकवाली से कीमत गिरती है, जिससे और लोग भी बेचने लगते हैं. इस बात से भी सोने का आकर्षण कम हुआ है कि अब सेंट्रल बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद है. चूंकि सोने से कोई इनकम नहीं होती, इसलिए ब्याज दरें ज्यादा होने पर कैश और बॉन्ड ज्यादा आकर्षक लगने लगते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि बॉन्ड या सेविंग्स अकाउंट से आपको गारंटीड रिटर्न मिल सकता है.

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Photo Credit: NDTV

डॉलर भी मजबूत हुआ है, जो आम तौर पर सोने के लिए बुरा होता है, क्योंकि डॉलर के बढ़ने पर विदेशी निवेशकों के लिए इसे खरीदना महंगा हो जाता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सोना लगातार गिरता ही रहेगा. जबरदस्त महंगाई और जियोपॉलिटिकल अस्थिरता का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है, और इसी ने सोने की कीमत को और ज्यादा गिरने से रोका हुआ है क्योंकि निवेशक अभी भी घबराए हुए हैं. उम्मीद है कि सेंट्रल बैंक इस मेटल की खरीदारी जारी रखेंगे, जिससे इसकी कीमत को सहारा मिलेगा. 

क्या अभी खरीदना चाहिए सोना

चार्ल्स स्टेनली डायरेक्ट के चीफ एनालिस्ट रॉब मॉर्गन कहते हैं, ‘अक्सर “सेफ हेवन” (सुरक्षित निवेश) कहे जाने के बावजूद, हालिया उतार-चढ़ाव वाली कीमतों से यह साबित होता है कि कम समय के लिए सोना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है. यह अपनी वैल्यू अच्छी तरह बनाए रखता है, लेकिन तभी जब आप इसे महीनों या सालों के बजाय दशकों के हिसाब से देखते हैं.’  अब आगे क्या करना है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने शुरुआत में निवेश क्यों किया था. वार्ड कहते हैं, ‘बहुत से निवेशक कीमतों में ऐसी गिरावट देखकर हैरान रह जाते हैं और सबसे कम कीमत पर ही बेच देते हैं. लेकिन अगर आपके पास सोना है और आपको नुकसान हो रहा है, तो घबराना नहीं चाहिए.’

अगर आपने जल्दी मुनाफा कमाने की उम्मीद में सोना खरीदा था और आपको कम समय के लिए पैसे की जरूरत है, तो नुकसान उठाकर उसे बेच देना बेहतर हो सकता है. अगर आपने अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और लंबे समय तक निवेश बनाए रखने के लिए सोना खरीदा था, तो अभी कम कीमत पर और सोना खरीदना एक अच्छा फैसला हो सकता है. हालांकि, कम समय में सोने की कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल है, लेकिन जानकारों का मानना ​​है कि सुरक्षा के लिए अपने पोर्टफोलियो का एक छोटा हिस्सा (आमतौर पर लगभग 5 प्रतिशत) इस एसेट में निवेश करके रखना चाहिए. 

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