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‘दिल्ली में बैठे सास-ससुर को मना लूंगा…’ चन्नी ने समर्थकों को क्यों सुनाई अपनी लव स्टोरी? | Charanjit Singh Channi Shares Love Story Amid Punjab Congress Leadership Row



पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस कैंपेन कमिटी के प्रमुख बनाए गए चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राजा वडिंग को हटा कर चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब कांग्रेस का प्रधान बनाने की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस के कई नेता आज चमकौर साहिब स्थित चन्नी के घर इकट्ठे हुए.

चन्नी ने दिखाई ताकत

चन्नी के घर हुई बैठक में पूर्व उप मुख्यमंत्री ओपी सोनी, चार से पांच मौजूदा विधायक, पार्टी के कई पदाधिकारियों के साथ बीते विधानसभा चुनाव के आधे से ज्यादा कांग्रेस उम्मीदवार मौजूद थे. चन्नी गुट के सूत्रों का दावा है कि विजय इंदर सिंगला, सुखजिंदर रंधावा जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी चन्नी के संपर्क में हैं.

राजा में भरोसा नहीं

ये सभी नेता राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने के कांग्रेस आलाकमान के फैसले से खुश नहीं हैं. इनका मानना है कि राजा वडिंग के नेतृत्व में कांग्रेस विधानसभा चुनाव जीत नहीं सकती.

सामूहिक इस्तीफे की रणनीति

सूत्रों के मुताबिक पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाने के लिए चन्नी समर्थक नेताओं ने सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा चन्नी को सौंप दिया है. तय हुआ है कि चन्नी ‘नेताओं-कार्यकर्ताओं की भावनाओं’ को लेकर पार्टी नेतृत्व से बात करेंगे. सूत्रों के मुताबिक बात नहीं बनी तो विकल्पों पर विचार किया जाएगा.

बैठक में चन्नी ने सुनाई अपनी लव स्टोरी

बैठक में मौजूद एक कांग्रेस नेता ने एनडीटीवी को बताया कि अपने समर्थकों को धीरज रखने की सलाह देते हुए चन्नी ने एक कहानी सुनाई. अपनी लव स्टोरी सुनाते हुए हुए चन्नी ने कहा कि मुझे एक लड़की पसंद आ गई थी. मैंने एक बार बस स्टैंड पर अपनी मां और बहनों को दूर से उसे दिखाया. जब उनकी मंजूरी मिल गई तो कुछ समय बाद मैं अपने होने वाले सास-ससुर से बात करने चला गया. तब मुझे डांट फटकार कर भगा दिया था. लेकिन मैं लगा रहा और आज वो लड़की मेरी पत्नी है. इसके बाद असल मुद्दे पर आते हुए चन्नी ने कहा, ‘मैं दिल्ली में बैठे सास-ससुर को मना लूंगा.’

चन्नी के कॉन्फिडेंस की वजह

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के सर्वे में पार्टी के बाक़ी नेताओं के मुकाबले चन्नी सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं. कांग्रेस के आंतरिक सर्वे में चन्नी के अलावा और कोई कांग्रेस नेता सीएम भगवंत मान को टक्कर देने की स्थिति में नहीं है. फिलहाल जालंधर से सांसद चन्नी दलित समाज से आते हैं. पंजाब में दलित आबादी करीब 33 प्रतिशत है. जाहिर है चन्नी का दावा कमजोर नहीं है.

राजा वडिंग गुट की दलील

हालांकि राजा वडिंग के करीबी दावा करते हैं कि कांग्रेस आलाकमान को आशंका है कि ईडी में चल रहे मामलों के दबाव में चन्नी बीजेपी के संपर्क में हैं. इसलिए पार्टी उनके हाथ में पंजाब की कमान नहीं सौंपना चाहती. उन्हें पार्टी ने सीएम बनाया गया था. ऐसे में चन्नी को पार्टी का अनुशासन नहीं तोड़ना चाहिए. राजा कैम्प की दलील है कि चन्नी के सीएम रहते भी पिछली बार दलितों ने कांग्रेस को एकतरफा वोट नहीं दिया था और चन्नी खुद दोनों सीटों से चुनाव हार गए. जबकि आम आदमी पार्टी की आंधी में भी राजा ने अपनी सीट पर जीत दर्ज की थी. इस गुट का कहना है कि पार्टी आलाकमान अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं करेगा. बल्कि टिकट बंटवारे में ज़्यादा भूमिका देने का वादा कर चन्नी को मना लिया जाएगा.

राहुल गांधी क्या करेंगे

राहुल गांधी ने काफी सोच विचार के बाद राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया था जो अप्रैल 2022 से इस पद पर हैं. चन्नी को प्रचार अभियान समिति का प्रमुख बनाने के साथ-साथ कांग्रेस नेतृत्व ने दो दलित नेताओं को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया और दलित समाज से आने वाले सांसद अमर सिंह को घोषणापत्र कमिटी का प्रमुख बनाया गया. ऐसे में देखना यही है कि राहुल गांधी इस पेंच को कैसे सुलझाते हैं. क्या चन्नी राहुल गांधी पर दबाव बनाने में कामयाब होंगे?

पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को ‘झगड़ा पार्टी’ कह कर संबोधित करते हैं. पंजाब कांग्रेस के नेता उन्हें सही साबित करने में जुटे हुए हैं. राहुल गांधी ने जल्द झगड़ा खत्म नहीं करवाया तो फिर कांग्रेस के ‘मिशन पंजाब’ को झटका लगना तय है.

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