
- हिमाचल में मानसून से 49 सड़कें, 42 बिजली ट्रांसफार्मर ठप पड़े.
- 27 पेयजल योजनाएं बाधित, चंबा जिले में सबसे अधिक प्रभावित हुईं.
- मानसून संबंधी घटनाओं में 11 लोगों की मौत, 12 अन्य घायल हुए.
- राज्य को 69.65 लाख का नुकसान, अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह.
हिमाचल प्रदेश में मानसून के चलते जनजीवन प्रभावित हो रहा है. मानसून के कारण कई जिलों में सड़क संपर्क, बिजली सप्लाई और पीने के पानी की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून से 2 जुलाई के बीच लगातार बारिश के कारण कई जगहों पर भूस्खलन, अचानक बाढ़ और बारिश से जुड़ी अन्य आपदाएं घटित हुईं हैं, जिससे प्रदेश में 49 सड़कें बंद, 42 बिजली ट्रांसफार्मर (DTR) प्रभावित हैं और 27 पेयजल योजनाएं बाधित हैं.
बुलेटिन में बताया गया है कि इससे प्रदेश में 11 लोगों की मौत हुई है. वहीं, बुलेटिन के अनुसार, प्रदेशभर में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को मानसून के कारण 69.65 लाख रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है.
प्रदेश में 49 सड़कें बंद, 42 बिजली ट्रांसफार्मर पड़े ठप
मानसून के कारण कुल्लू में सबसे ज्यादा 30 सड़कें बंद हैं. इनमें बंजार, कुल्लू, मनाली और निरमंड उपमंडल शामिल हैं. वहीं, सिरमौर में 8 सड़कें, चंबा में 7 सड़कें, लाहौल-स्पीति और ऊना में 2-2 सड़कें बंद हैं. मानसून के कारण लोगों को पावर कट भी झेलना पड़ रहा है क्योंकि बिजली ट्रांसफार्मर ठप पड़ गए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कुल 42 बिजली ट्रांसफार्मर (DTR) प्रभावित हैं. सिरमौर के नाहन उपमंडल में सबसे अधिक 27 डीटीआर बंद हैं. इसके अलावा चंबा में 8 डीटीआर, कुल्लू में 3 डीटीआर, मंडी में 3 और लाहौल-स्पीति में 1 डीटीआर प्रभावित है.
पीने के पानी पर भी असर
मानसून के कहर के कारण प्रदेश के लोगों के लिए पीने के पानी की समस्या भी बढ़ती दिखाई दे रही है. यहा पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं, जिससे लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं. रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कुल 27 पेयजल योजनाएं बाधित हैं, जिनमें सभी चंबा जिले में प्रभावित हुई हैं. इनमें चंबा उपमंडल की 3 और तीसा उपमंडल की 24 योजनाएं शामिल हैं.
मानसून के कारण अब तक 11 लोगों की मौत
मानसून की बारिश व अन्य घटनाओं के कारण 30 जून से 2 जुलाई 2026 के बीच प्रदेश में कुल 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोग घायल हुए हैं. इसके अलावा 44 लोगों को एक्स-ग्रेशिया (राहत) राशि दी गई है. राज्य आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ (SEOC) की 1 जुलाई तक की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 2 जुलाई तक में आपदा जनित घटनाओं में 11 लोगों की मौत हुई है. इनमें कांगड़ा जिले में 4, शिमला में 3, मंडी में 1, कुल्लू, चंबा, लाहौल-स्पीति और हमीरपुर में एक-एक लोगों की जान गई है. अधिकारियों ने बताया कि ये मौतें खराब मौसम के बीच डूबने, बिजली का करंट लगने और चट्टानों या पेड़ों से अचानक गिरने के कारण हुईं हैं.
संपत्ति को लाखों का नुकसान
मानसून से अब तक प्रदेश में करीब 69.65 लाख रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है. सबसे अधिक नुकसान मंडी जिले में 24.10 लाख रुपये, कांगड़ा जिले में 16 लाख रुपये और शिमला में 8.30 लाख रुपये का हुआ है. बाकी नुकसान की जानकारी बारिश से प्रभावित अन्य जिलों से मिली है. प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है.
