
एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी एक बार फिर यूपी में अपनी पार्टी की किस्मत आजमाने की कोशिश में हैं. ओवैसी की पार्टी यूपी में उन सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की कोशिश में है, जहां मुस्लिम वोटर्स जीत या हार तय करने में बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं. बीते कुछ दिनों में यूपी में दो दौरे कर चुके ओवैसी अब सोशल मीडिया में पूरा गेम बदल देने का दावा कर रहे हैं.
असदुद्दीन ओवैसी ने अपने सोशल मीडिया में एक तस्वीर पोस्ट कर दावा किया है कि “यूपी में गेम बदल देंगे”. इस पोस्ट में एक तस्वीर भी है. तस्वीर में ओवैसी हैं, यूपी का नक्शा है, सामने खड़ी भीड़ है और भारत का झंडा है. इस तस्वीर में ओवैसी की पार्टी का लोगो है और एक स्लोगन है, जिसमें वो “यूपी में पूरा गेम बदल देंगे” कहते दिखाई दे रहे हैं.

ऐसा नहीं है कि ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम पहली बार यूपी में चुनाव लड़ने जा रही है. इससे पहले भी वो अपने प्रत्याशी उतार चुके हैं. हालांकि, यूपी में उनकी पार्टी आज तक एक भी सीट नहीं जीत पाई है. बावजूद इसके ओवैसी के यूपी में चुनाव लड़ने को लेकर विपक्षी दलों में बेचैनी साफ देखी जा सकती है.
विपक्ष क्यों हो गया परेशान
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ओवैसी के उतरने से उनका फायदा होगा या नहीं, ये तो चुनाव नतीजों से पता चलेगा, लेकिन विपक्ष में उनको लेकर बेचैनी स्वाभाविक है. इसकी वजह ये है कि ओवैसी जिस मुस्लिम वोट बैंक को साधने में लगे हैं, वो पारंपरिक तौर पर बीजेपी के ख़िलाफ़ खड़ी पार्टी के पक्ष में रहा है. वर्तमान में मुस्लिम वोटबैंक का सबसे बड़ा हिस्सा सपा को जाता दिखता है.
बात करें यूपी में गठबंधन की तो सपा और कांग्रेस इंडिया अलायन्स के तहत एक साथ हैं. ओवैसी फिलहाल किसी गठबंधन में शामिल नहीं हैं. हालांकि, वो बीजेपी को हराने के लिए खुलकर गठबंधन में जाने की इच्छा जता रहे हैं, लेकिन उन्हें हमेशा बीजेपी की बी टीम कहकर सपा और कांग्रेस जैसे दल दूरी बनाए रखते हैं.
असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही के बहराइच से अपनी चुनावी तैयारियां शुरू की हैं. उसके बाद वो बिजनौर भी गए और बीजेपी के खिलाफ आग उगलते दिखाई दिए. बीजेपी के खिलाफ बोलने के बावजूद सपा, कांग्रेस से लेकर बीएसपी कभी उनको अपने आसपास फटकने नहीं देते. विपक्ष ओवैसी को बीजेपी के इशारों पर चलकर विपक्ष का नुकसान करने के लिए चुनाव लड़ने का आरोप लगाता रहा है.
स्वामी प्रसाद और चंद्रशेखर से होगी डील?
एआईएमआईएम की बातचीत स्वामी प्रसाद मौर्य और चंद्रशेखर आजाद के साथ चल रही है. हालांकि, ये गठबंधन भी होगा या नहीं, इसको लेकर स्थिति साफ नहीं है. स्वामी प्रसाद मौर्य यूपी की राजनीति में अब मजबूत आवाज नहीं रह गए हैं. ऐसे में उनके साथ जुड़ने से भी ओवैसी का कोई बहुत भला होगा, ये कहना जल्दबाजी होगी. चंद्रशेखर आजाद भी चुनावी तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन उनके साथ भी ओवैसी के जाने से कितना असर होगा, ये भविष्य में ही पता चलेगा.
बीजेपी को भी हो सकती है दिक्कत
फिलहाल बीजेपी इस बात से खुश है कि ओवैसी अगर लड़ते हैं तो उसे कहीं ना कहीं इसका फायदा जरूर मिल सकता है. मुस्लिम बहुत सीट पर कई मुस्लिम प्रत्याशी होने पर समीकरण कई बार बीजेपी के पक्ष में चला जाता रहा है. ऐसे में ओवैसी के ऐलान से अगर सबसे ज्यादा कोई खुश है तो बिना शक वो बीजेपी ही है. हां, अगर ओवैसी बाय-चांस इंडिया अलायन्स में चले जाएं तो सबसे अधिक परेशानी भी बीजेपी की ही बढ़ेगी.
एआईएमआईएम ने इस बार यूपी में 200 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है. हालांकि, पार्टी के सूत्र बता रहे हैं कि ओवैसी के प्लान में सिर्फ ऐसी 40 सीटें हैं, जहां वो अपने प्रत्याशी उतारेंगे. बाकी वो माहौल बनाने के लिए 200 का आंकड़ा बता रहे हैं. यूपी की 40 मुस्लिम बहुल सीटों को चिन्हित कर उन्होंने अपने संभावित प्रत्याशियों को ग्रीन सिग्नल भी दे दिया है. प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को बहराइच की मटेरा सीट से उतारने का ऐलान खुद ओवैसी कर चुके हैं. ऐसे में गेम बदलने का दावा करने वाले ओवैसी फिलहाल इंडिया अलायन्स के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं.
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