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Explainer: बिहार का टेंडर घोटाला क्या है? जिसको लेकर तेजस्वी हुए हमलावर, ठेकेदार रिशु श्री पर क्या आरोप हैं | Bihar Tender scam What are allegations against contractor Rishu Shree


टेंडर घोटाले को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है. तेजस्वी यादव ने रविवार को भ्रष्टाचार और सरकारी स्कीम में अनियमितता को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. साथ ही टेंडर घोटाले में बड़ी मछलियों को छोड़ने का आरोप लगाते हुए तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से 20 सवाल किए गए. घोटाले के मास्टरमाइंड ठेकेदार रिशु श्री को लेकर तेजस्वी ने पूछा कि आखिर एक मामूली सा ठेकेदार कई विभागों के टेंडर कैसे मैनेज कर रहा था? इसके अलावा तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सवाल किया कि यह घोटाले कितने का हुआ, क्यों नहीं बताया गया. आईए जानते हैं कि आखिर यह टेंडर घोटाले क्या है, जिसको लेकर तेजस्वी यादव ने बिहार की सम्राट चौधरी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. 

ठेकेदार रिशु श्री टेंडर घोटाले का मुख्य आरोपी

दरअसल, टेंडर घोटाले की पूरी कहानी बिहार के चर्चित ठेकेदार रिशु श्री के इर्द गिर्द ही घूमती है. मामले की शुरुआत 2023 के आसपास होती है. एक एफआईआर से टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता की बात सामने आई. जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ईडी ने टेंडर प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और ठेकेदारों के ठिकानों पर छापेमारी की, जिस पर करोड़ों रुपये नकद और सोने-चांदी जेवरात बरामद हुए. इस पूरे फर्जीवाड़े पर ठेकेदार रिशु श्री की कंपनियों और कई बड़े अधिकारियों पर ईडी को संदेह हुआ. जिसकी विस्तृत जांच के लिए सिफारिश की गई. 

7-8 साल में धनकुबेर बन गया रिशु श्री

जिसके बाद ईडी के इनपुट के आधार पर विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने ठेकेदार रिशु श्री और IAS संजीव हंस समेत अन्य लोगों पर 30 अप्रैल 2025 को नामजद मामला दर्ज किया. ठेकेदार रिशु श्री पर आरोप लगा कि वह अफसरों के साथ मिलीभगत करके टेंडर प्रक्रिया में खेल करता था. जांच में पता चला कि उसने टेंडर प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा करके करोड़ों की कमाई की और वह 7-8 सालों में ही धनकुबेर बन गया. अवैध कमाई से रिशु श्री ने दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पटना और बिहार के विभिन्न स्थानों पर बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की.

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एसवीयू ने बताया कि छापेमारी में उसके ठिकानों से 53.5 लाख रुपये नकद, 2.13 करोड़ रुपये के आभूषण, करीब 58.58 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन से जुड़े दस्तावेज और कई महंगे वाहन बरामद किए गए थे.

IAS अधिकारियों विदेश की करवाता सैर

इसी साल 27 मई को पटना में मीठापुर स्थित रिशु श्री के ठिकानों पर SVU की रेड में करोड़ों रुपये की नकदी और संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए. उसके बाद ठेकेदार रिशु श्री को गिरफ्तार किया गया. यहीं नहीं दो आईएस अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार को टेंडर प्रभावित करने और रिश्वत के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया. इन दोनों अफसरों पर ठेकेदार रिशु श्री के खर्चे पर विदेश यात्रा का करने की बात सामने आई. अभिलाषा और रिशु श्री के व्हाट्सअप चैट से यह भी पता चला कि BMSICL के MD रहे धर्मेंद्र सिंह ने भी कई विदेश यात्राएं की. इसके बाद रिशु श्री की कंपनी को टेंडर मिला.

IAS संजीश हंश, अभिलाषा शर्मा और योगेश कुमार सागर

IAS संजीश हंश, अभिलाषा शर्मा और योगेश कुमार सागर

SVU की चार्जशीट किस-किसका नाम?

जांच में यह सामने आया कि आईएएस योगेश सागर और उनके रिश्तेदारों को रिशु श्री ने विदेश घुमाया. महंगे होटल, फ्लाइट का बिल सब रिशु श्री ने दिया. इस पर करीब 22 लाख रुपए खर्च हुए. इस दौरान वे बुडको के एमडी थे. इस लिहाज से नगर विकास के कई टेंडर रिशु श्री के इशारे पर दिए गए. ठेकेदार रिशु श्री ने कई IAS अधिकारियों को महंगे तोहफे देकर मनचाहा टेंडर हासिल किया.

इसके अलावा दूसरी कम्पनियों को टेंडर दिलाकर भी उसने कमीशन कमाया. इसी महीने 24 जून को एसवीयू ने ठेकेदार रिशु श्री, IAS संजीव हंस, संतोष कुमार और पवन कुमार समेत 7 आरोपियों के खिलाफ 4000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. इस चार्जशीट में मुमुक्षु चौधरी, तारिणी दास और उमेश सिंह का भी नाम शामिल है.

इन सब पर रिश्वत, टेंडर आवंटन में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं. SVU के अनुसार, रिशु श्री सरकारी विभागों में टेंडर और बिल भुगतान के बदले अधिकारियों को 2 से 3.5 प्रतिशत तक कमीशन देता था. 

जांच में सामने आया कि IAS संजीव हंस के जल संसाधन विभाग में सचिव रहने के दौरान कोसी बेसिन विकास परियोजना से जुड़े कार्यों में अनियमितताएं हुईं और रिशु श्री की कंपनियों से कमीशन लेने के साक्ष्य मिले. विजिलेंस यूनिट (SVU) ने बताया कि ठेकेदार रिशु श्री ने अपने प्रभाव से कोशी बराज में फिजिकल मॉडलिंग सेंटर का टेंडर पहले अहमदाबाद की कंपनी को दिलाया था.

बाद में पवन कुमार के डायरेक्टर शिप वाली खुद की कंपनी को काम दिलाया. इस काम के लिए पहले 69 करोड़ की राशि का टेंडर निकला था. बाद में इसी काम का दूसरा टेंडर निकला, इसकी राशि बढ़ कर 98 करोड़ हो गई. रिशुश्री अपने फेवरेट कंपनी को आगे करता था. टेंडर दिलवाने में मदद करता था. फिर उन कंपनियों से 7 से 10 % कमीशन लेता था. इसमें अधिकारियों को भी हिस्सा देता था. लेनदेन के सबूत मोबाइल में और कागजात में मिले हैं.

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