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इजरायल-कुवैत-कतर मिल जाएं तब भी NCR से छोटे ही होंगे… कहानी दिल्ली-NCR की | how delhi ncr was formed history ncr explained


नई दिल्ली:

दिल्ली-NCR प्लानिंग बोर्ड की मंगलवार को बैठक हुई. इस बैठक में NCR के क्षेत्र को कम करने का प्रस्ताव नामंजूर कर दिया गया. हरियाणा सरकार ने 5 जिलों को NCR से बाहर करने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन बोर्ड मीटिंग में तय हुआ कि अभी NCR में जितने जिले हैं, उतने ही रहेंगे. इस बैठक में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मंत्रियों ने हिस्सा लिया था.

NCR अभी 30 से ज्यादा जिलों में फैला है. ये जिले राजधानी दिल्ली से 150 से 175 किलोमीटर दूर तक फैले हुए हैं. ‘ड्राफ्ट रीजनल प्लान 2041’ में इस दायरे को सिमटाकर 100 किलोमीटर में करने का प्रस्ताव है.

लेकिन ये दिल्ली-NCR बना कैसे?

आजादी के बाद से ही दिल्ली की आबादी तेजी से बढ़ने लगी थी. हर 10 साल में दिल्ली की आबादी 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ रही थी. आबादी बढ़ने की बड़ी वजह यही थी कि दिल्ली में लोग रोजगार की तलाश में आकर बस रहे थे. सिर्फ आसपास के ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के राज्यों से भी आकर लोग यहां बस रहे थे. 

आबादी बढ़ने से दिल्ली में सुविधाओं की कमी होने लगी. तभी अंदाजा लगाया गया कि जैसे-जैसे दिल्ली की आबादी बढ़ेगी, वैसे-वैसे जमीन, घर, ट्रांसपोर्ट, पानी की सप्लाई और सीवरेज जैसी सुविधाओं के मैनेजमेंट से जुड़ी समस्याएं बढ़ती जाएंगी.

दिल्‍ली के इनसाइक्‍लोपीडिया माने जाने वाले सीनियर कॉलमिस्‍ट और ऑथर विवेक शुक्‍ला ने NDTV से बातचीत में बताया कि NCR की परिकल्‍पना ही दिल्‍ली का बोझ कम करने से जुड़ी है. NCR को इसलिए स्थापित किया गया था, ताकि दिल्ली से सरकारी दफ्तरों को आसपास (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) शिफ्ट किया जा सके. राजधानी दिल्ली पर आबादी का दबाव घटाना मुख्‍य उद्देश्‍य था पर ये नहीं हुआ.’

आगे वो कहते हैं कि कोल इंडिया, सेल, भेल जैसे सरकारी उपक्रमों के हेड ऑफिस दिल्ली में ही है. कई बैंकों के हेड ऑफिस भी. जबकि इसकी बहुत जरूरत नहीं है. कोल इंडिया, शिपिंग और ऐसी ही तमाम कंपनियों के हेड ऑफिस का दिल्‍ली में भला क्‍या काम. वे दूसरे शहरों में भी हो सकते हैं. 

1956 में एक अंतरिम जनरल प्लान आया. इसमें सुझाव दिया गया कि सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों को भी प्लान के तहत बसाया जाना चाहिए. 1962 में दिल्ली का मास्टर प्लान बना, जिसमें दिल्ली और आसपास के इलाकों को ‘दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एरिया’ नाम दिया गया. इसमें दिल्ली के अलावा गाजियाबाद, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, गुड़गांव और बहादुरगढ़ जैसे इलाके शामिल थे.

आखिरकार, 1985 में संसद ने ‘नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड एक्ट’ पास किया और इसमें दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सहमति से NCR प्लानिंग बोर्ड का गठन किया गया.

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कितना बड़ा है NCR?

शुरुआत में NCR में कुछ ही जिले शामिल थे. लेकिन बाद में नए जिले बनते गए और कई नए जिलों को NCR में शामिल किया जाने लगा. इससे NCR का दायरा बढ़ गया. मसलन, 2013 में 3, 2015 में 3 और 2018 में एक नया जिला जोड़ा गया.

पहले NCR का क्षेत्रफल लगभग 34 हजार वर्ग किलोमीटर के आसपास था. 2013 तक इसका दायरा बढ़कर 45,887 वर्ग किलोमीटर हो गया. 

आज के समय में NCR में 24 जिलों के साथ-साथ दिल्ली शामिल हैं. इसमें हरियाणा के 14, उत्तर प्रदेश के 8, राजस्थान के 2 और दिल्ली के 11 जिले हैं.

NCR आज के समय में 55,083 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. इसमें दिल्ली का 1,483 वर्ग किलोमीटर एरिया शामिल है. हरियाणा का सबसे ज्यादा 25,327 वर्ग किमी, यूपी का 14,826 वर्ग किमी और राजस्थान का 13,447 वर्ग किमी एरिया है.

NCR कितना बड़ा है? इसे ऐसे समझ सकते हैं कि आज अगर इजरायल, कुवैत और कतर तीनों साथ मिल जाएं, तब भी NCR से छोटे ही रहेंगे. इजरायल, कुवैत और कतर तीनों को मिलाकर कुल एरिया 50,174 वर्ग किमी है. अगर देश से तुलना की जाए तो अकेला NCR ही पंजाब (50,363 वर्ग किमी) और उत्तराखंड (53,483 वर्ग किमी) से बड़ा है.

और आर्थिक सेहत कैसी है?

‘ड्राफ्ट रीजनल प्लान 2041’ के मुताबिक, देश की जीडीपी में दिल्ली-NCR की हिस्सेदारी 8% से ज्यादा है. सबसे ज्यादा ग्रोथ करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में दुनिया के 300 मेट्रो शहरों में दिल्ली-NCR 6वें नंबर पर है.

इस प्लान में बताया गया था कि दिल्ली-NCR की जीडीपी 2011-12 में 21.5 लाख करोड़ रुपये थे. 2016-17 में यह बढ़कर 31 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई. ये आंकड़े लगभग 10 साल पुराने हैं और जाहिर है कि इसमें काफी इजाफा हुआ होगा.

दिल्ली-NCR में मेट्रो का नेटवर्क 416 किलोमीटर तक फैला हुआ है. इसमें नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्वा लाइन और रैपिड मेट्रो गुरुग्राम का नेटवर्क भी शामिल है. कुल मिलाकर पूरे दिल्ली-NCR में कुल 303 स्टेशन बने हुए हैं.

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लेखक के बारे में

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प्रियंक द्विवेदी

चीफ सब एडिटर

डेटा स्टोरीज, एक्सप्लेनर और इंडेप्थ खबरों पर काम करने में दिलचस्पी है. राजनीति के साथ-साथ वर्ल्ड, बिजनेस और लीगल न्यूज पर काम करना पसंद है. घूमना-फिरन…
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