

लखनऊ:
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से भगवान राम और भगवान कृष्ण की तुलना करते हुए कुछ टिप्पणियां किए जाने पर अखिलेश यादव ने आपत्ति जताई है. उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के बयान को ईशनिंदा बताते हुए अक्षम्य अपराध करार दिया. सपा नेता ने उनके बयान के पीछे षड्यंत्र की बात की और कहा कि यह मामला गहरी जांच का विषय है. उन्होंने कहा कि एक अवतार के मुक़ाबले दूसरे अवतार को बेहतर बताने की साज़िश सनातन समाज के विरुद्ध चली जा रही बहुत गहरी चाल है. हर सच्चा सनातनी इन दोनों अवतारों का उपासक होता है. नवमी-अष्टमी का भेद किसी के मन में नहीं होता. इस अवांछित तुलना से सनातन समाज इतना आहत हुआ है कि दोनों अवतारों के नाम का उल्लेख करके हम उसे और आहत नहीं करना चाहते हैं.
सनातन समाज के अतिरिक्त भी अन्य समाज और वैश्विक संगठन भी घोर आहत महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक समाचार है कि कोई राजनीतिक प्रश्रय प्राप्त ‘लघु-बंधु’ बनकर घूम रहा व्यक्ति सनातन समाज की एकता को तोड़ने का अति निंदनीय कार्य कर रहा है. ये गहरी जांच का विषय है कि सनातनियों के बीच सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का षड्यंत्र कौन कर रहा है, क्या इसके पीछे कोई बाहरी शक्ति है या आंतरिक, इसकी पड़ताल अपरिहार्य है.’ यूपी के पूर्व सीएम ने कहा कि ‘लोकरक्षक’ और ‘लोकरंजक’ दोनों ही एक ही के अवतार हैं, दोनों की लीलाएं अपने समय-काल के अनुरूप घटित हुई हैं. फिर ऐसी गरिमाहीन तुलना का तर्क क्या है और उसके पीछे क्या मंसूबा है ये स्पष्ट किया जाए.
ईशनिंदा का अपराध करनेवाले ऐसे व्यक्ति के पीछे उसके किसी संगी-साथी की कुटिल मंशा कार्यरत दिखती है. ऐसे निंदात्मक विषय पर तो हर राजनीतिक दल और उसके समर्थक भी इस तथाकथित वाचक के विरुद्ध एकजुट हो गए हैं. अगर इसे नहीं रोका गया तो इससे समाज में अशांति और असंतोष का वैमनस्यकारी वातावरण बनेगा. ये अक्षम्य पाप है, ऐसे व्यक्ति को समाज, सनातन, देश हित में निरुद्ध-अवरुद्ध करना ही एकमात्र उपाय है. दरअसल एक कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और कृष्ण की तुलना की थी.
उन्होंने कहा था कि भगवान राम का नाम तो सरल और सीधा है, जबकि कृष्ण का नाम टेढ़ा है. राम जी की अयोध्या भी सरल और सीधा नाम है, जबकि वृंदावन टेढ़ा है. इससे भी आगे बढ़ते हुए उन्होंने एक भजन गया था, जिसके बोल थे. बंसी का बजाना तो खेल भी है, पर धनुष चलाना खेल नहीं. हालांकि तब भी उनका कहना था कि मैंने यह बात हास्य-विनोद में कही है. इस पर जब विवाद छिड़ा तो फिर सफाई भी दी और कहा कि मैंने भाव में यह सब कहा था. मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था.





