

कार्ल बुशबी सोमवार को उत्तरी इंग्लैंड में अपनी मां के घर लौट आए. इसके साथ ही उन्होंने दुनिया भर में पैदल यात्रा करने का अपना 28 साल लंबा सफर पूरा किया. इंग्लैंड के हल शहर में अपने घर के बाहर, बुशबी ने अपनी भावुक मां एंजेला को गले लगाया. यहीं से उन्होंने 1998 में अपनी यात्रा शुरू की थी. घर के बाहर लोगों की भीड़ जमा थी, जिनके हाथों में एक बैनर था जिस पर लिखा था, “घर वापसी पर स्वागत है बेटे.”
29 के गए थे लौटे 57 साल के
जब बुशबी ने अपने घर से ऑक्सफ़ोर्ड के पास स्थित रॉयल एयर फोर्स बेस तक पैदल यात्रा की और वहां से दक्षिण अमेरिका के लिए उड़ान भरी, तब वह 29 साल के पूर्व पैराट्रूपर थे. अब जब वे लौटे हैं, तो उनकी उम्र 57 साल है. वे पहले से ज्यादा शांत और परिपक्व हो गए हैं, उनके बाल सफ़ेद हो गए हैं और चेहरे पर लंबे सफ़र की छाप दिखती है, लेकिन वे दुनिया को कहीं बेहतर समझने लगे हैं.
कैसे आया दिमाग में ये ख्याल
बुशबी में रोमांच की चाह तो थी, लेकिन उनके मिशन को एक स्पष्ट दिशा तब मिली जब 90 के दशक के मध्य में उनके पिता कीथ ने उन्हें जन्मदिन का एक कार्ड भेजा. उनके पिता (जो खुद सेना के पूर्व सैनिक थे) ने बताया कि उनकी स्पेशल फोर्स की टुकड़ी में इस बात पर बहस हो रही थी कि क्या बेरिंग लैंड ब्रिज के रास्ते लंदन से न्यूयॉर्क तक पैदल जाया जा सकता है. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राचीन काल में, जब समुद्र का जलस्तर कम था, तब शुरुआती इंसानों ने इसी रास्ते से एशिया से अमेरिका तक प्रवास किया था. बस यहीं से कार्ल को अपने सफर पर निकलने का क्लू मिल गया.
रेगिस्तान से समंदर तक पार किया
खतरनाक जंगलों, तपते रेगिस्तानों और बर्फीले टुंड्रा इलाकों ने उनके सफर की गति धीमी कर दी, लेकिन सरकारी कागजी कार्रवाई और नियमों की उलझनों ने भी अक्सर उनके इस अभियान को लंबे समय के लिए रोक दिया. शुरुआत में बुशबी को लगा था कि यह दूरी लगभग पांच साल में तय हो जाएगी, लेकिन उन्हें पता था कि यह सोचना व्यावहारिक नहीं था. उन्होंने कहा, “जब आप इसमें असलियत की पूरी बाल्टी उड़ेल देते हैं, तो तस्वीर बदल जाती है. हमें अंदाजा था कि इसमें 12 साल से ज्यादा का समय लगेगा—और वह ‘ज्यादा’ भी काफी बड़ा था. लेकिन हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि इसमें पूरे 28 साल लग जाएंगे.”
2001 में, उन्होंने दक्षिण और मध्य अमेरिका के बीच स्थित ‘डारिएन गैप’ ऐसा दुर्गम इलाका है, जहां कोई सड़क नहीं है और घने जंगल, वर्षावन और पहाड़ हैं . यहां से गुजरते हुए युद्ध जैसी स्थितियों से उन्होंने खुद को बचाया. इसके बाद, पनामा में एक प्रतिबंधित सीमा क्षेत्र पार करने के कारण उन्हें 18 दिनों तक जेल में रहना पड़ा.
2006 में, अमेरिकी दिमित्री कीफर के साथ 56 मील (90 किलोमीटर) चौड़े ‘बेरिंग स्ट्रेट’ को पार करते समय उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने फिर से शुरुआत की, जहां उनका सामना एक ध्रुवीय भालू (पोलर बियर) से हुआ. वे बर्फीले पानी में डूबने से बाल-बाल बचे और जब उनकी स्लेज (बर्फ पर चलने वाली गाड़ियां) समुद्र में गिर गईं, तो उनका लगभग सारा सामान भी खो गया. इस कठिन सफर को पूरा करने के बाद, रूस में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में उन्हें जेल में डाल दिया गया और देश से निकाले जाने (डिपोर्टेशन) का सामना करना पड़ा.
वीजा संबंधी समस्याओं और मौसम की ऐसी मार के कारण – जहां साल में केवल कुछ महीने ही यात्रा करना संभव था – बुशबी को रूस पार करने में लगभग 10 साल लग गए. 2012 में जब रूस ने उन्हें वीजा देने से इनकार कर दिया, तो बुशबी ने विरोध जताते हुए लॉस एंजिल्स से वाशिंगटन डी.सी. स्थित रूसी दूतावास तक पैदल यात्रा की. आखिरकार, इस कदम की बदौलत उन्हें जरूरी दस्तावेज मिल गए.
यह भी पढ़ें | NSA अजीत डोभाल वियतनाम में, जानिए भारत के लिए क्यों है ये देश अहम





