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NDTV Profit IGNITE: खुद मार्केट में पैसे नहीं लगाते NSE चीफ पर रखते हैं पल-पल की खबर, बताया- भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने का फॉर्मूला | NDTV Profit Ignite 2026 NSE Chairman Ashish Chauhan on IPO Pricing, AI and Foreign Investment



नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के MD और CEO आशीष कुमार चौहान शेयर बाजार में खुद निवेश नहीं करते, लेकिन वो हर कुछ मिनट में बाजार की चाल पर नजर डालते हैं. मुंबई में NDTV Profit IGNITE कार्यक्रम में NDTV ग्रुप के एडिटर इन चीफ और CEO राहुल कंवल के साथ बातचीत में उन्होंने बताया कि वो शेयर बाजार में खुद निवेश नहीं करते, लेकिन बाजार के आंकड़ों को नियमित रूप से देखते रहते हैं. बाजार में उनकी दिलचस्पी लगातार बनी रहती है. 

इस दौरान उन्होंने NSE के अपकमिंग आईपीओ की कीमत, भारत में विदेशी निवेश की सुस्ती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से दुनिया के बाजारों में आए बदलाव पर भी अपनी राय रखी.

‘IPO की कीमत नहीं रिटर्न है अहम’ 

आशीष कुमार चौहान ने कहा, ‘मैं शायद हर कुछ मिनट में बाजार देखता हूं. मेरा मतलब है कि हर कुछ मिनट में मैं आंकड़ों पर नजर डालता हूं.’ आईपीओ की कीमत को लेकर चौहान ने कहा कि सिर्फ इस बात पर ध्यान देना जरूरी नहीं है कि किसी कंपनी का आईपीओ किस कीमत पर आया. उनके मुताबिक, ज्यादा अहम ये है कि आखिरकार निवेशक को कितना रिटर्न मिलता है. उन्होंने कहा, आईपीओ की कीमत महत्वपूर्ण नहीं है. आखिर में आप कहां पहुंचते हैं, ये मायने रखता है.’ 

 भारत में विदेशी निवेश क्यों नहीं आ रहा?

भारत में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर बात करते हुए चौहान ने कहा कि विदेशी निवेश की सुस्ती कोई नई बात नहीं है. उनके मुताबिक, ये स्थिति करीब तीन साल से बनी हुई है और इसके पीछे कई कारण हैं.

उन्होंने कहा कि दुनिया भर का बड़ा निवेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों और बाजारों की ओर गया है. चौहान के मुताबिक, भारत के पास फिलहाल AI से जुड़ी वैसी निवेश कहानी नहीं है, जैसी अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में देखने को मिली है.

उन्होंने कहा कि जब किसी बाजार में निवेश की मजबूत कहानी बनती है, तो दुनिया भर के निवेशक उस ओर आकर्षित होते हैं. इसके लिए वे उन बाजारों से पैसा निकाल सकते हैं, जहां उस समय वैसी संभावनाएं नहीं दिख रही होतीं.

AI से अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया को फायदा

चौहान ने वैश्विक बाजारों में AI से जुड़ी तेजी का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले तीन साल में दुनिया के बाजारों के कुल मार्केट कैप में बड़ा उछाल आया है. उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि करीब तीन साल पहले वैश्विक बाजारों का कुल मार्केट कैप 35 से 40 ट्रिलियन डॉलर के आसपास था, जो अब बढ़कर करीब 75 ट्रिलियन डॉलर हो गया है. उनके मुताबिक, इस तेजी में AI की बड़ी भूमिका रही है.

उन्होंने कहा कि जब किसी सेक्टर या बाजार में निवेश का एक मजबूत ट्रेंड बनता है, तो कई बार निवेश उस बाजार की वास्तविक क्षमता से भी आगे निकल जाता है. ऐसे चक्र में तेजी कुछ समय तक जारी रह सकती है, लेकिन बाद में निवेशक मुनाफा निकालकर दूसरे बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं.

चौहान के मुताबिक, जब AI से जुड़ी तेजी का चक्र धीमा पड़ेगा या निवेशकों को कुछ बाजारों का मूल्यांकन ज्यादा लगने लगेगा, तो पूंजी दूसरे बाजारों की ओर जा सकती है. इससे उभरते बाजारों को भी फायदा मिलने की संभावना बन सकती है.

भारत में कैसे बढ़ सकता है विदेशी निवेश?

चौहान की टिप्पणी के मुताबिक, भारत में विदेशी निवेश की वापसी इस बात पर भी निर्भर करेगी कि यहां निवेशकों को किस तरह की ग्रोथ सटोरी दिखाई देती है. AI से जुड़े कारोबार, कंपनियों की विकास संभावनाएं और मार्केट वैल्‍युएशन इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं.

उन्होंने ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब किसी बाजार में तेजी उसकी क्षमता से आगे निकल जाती है, तो निवेशक दूसरे विकल्प तलाशने लगते हैं. ऐसे में उभरते बाजारों की ओर पूंजी का रुख बदल सकता है.

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