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पूर्व IAS दिव्या मित्तल की जननीति 403 सीटों पर लड़ेगी चुनाव, भाजपा और सपा समेत सब रहेंगे पीछे | ex ias divya mittal janniti bharat party will field 403 candidates in up elections



मिर्जापुर:

आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में उतरीं दिव्या मित्तल की पार्टी जननीति का यह पहला चुनाव है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जननीति भी उतरेगी और दिव्या मित्तल खुद भी मिर्जापुर सीट से उतरने वाली हैं. इस बीच दिव्या मित्तल ने एक और बड़ा ऐलान किया है और कहा कि उनका दल राज्य की सभी 403 सीटों पर कैंडिडेट उतारेगा. उनका कहना है कि हम सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े करेंगे. शनिवार को चुनार में जनता से संवाद के बीच दिव्या मित्तल ने यह ऐलान किया. यदि ऐसा होता है तो जननीति चुनाव लड़ने में सबसे आगे होगी. भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा समेत कोई भी दल सभी 403 सीटों पर कैंडिडेट नहीं उतारेगा. 

ऐसे में दिव्या मित्तल की जननीति रिकॉर्ड बनाने में सफल होगी. भले ही चुनाव नतीजा कुछ भी आए, लेकिन उम्मीदवार खड़े करने में तो वह बाजी मार ही लेंगी. चुनाव में गुहराज निषाद पार्क में उन्होंने निषादराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया. इसके बाद वहां मौजूद जनता से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी विधनासभा चुनाव लड़ेगी. चुनार में भी हम प्रत्याशी खड़ा करेंगे. आप लोग समर्थन करिएगा. जहां-जहां हमें मजबूत कैंडिटेट मिलेगा, हम 403 सीटों पर प्रत्याशी उतारेंगे. 

दिव्या मित्तल के चुनाव लड़ने के ऐलान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दिव्या मित्तल ने लोगों से बात करते हुए कहा कि आज भी देश में सड़क और पानी की ही बात कर रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि राजनीतिक दल सिर्फ राज करने के लिए काम कर रहे हैं. अब हम ऐसा चाहते हैं कि जनता से संवाद करके नीतियां तैयार की जाएं. इसीलिए हमने पार्टी का नाम ही जननीति रखा है.   

खुद मिर्जापुर सीट से उतरेंगी दिव्या मित्तल

पूर्व अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने दल का नाम जननीति भारत पार्टी रखा है. उन्होंने मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से खुद के चुनाव लड़ने की बात कही है. दिव्या मित्तल के राजनीतिक मैदान में उतरने के साथ ही मिर्जापुर की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है. पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल अब प्रशासनिक भूमिका से आगे बढ़कर सक्रिय राजनीति में उतर आई हैं. फिलहाल जगह-जगह पर उनका स्वागत हो रहा है. प्रशासन से निकलकर वह अब मंच, माला और माइक वाली नेता बन चुकी हैं, लेकिन चुनावी सफलता कितनी मिलती है, यह देखना अहम होगा. 




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