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सूरत में चांदी पड़वा पर ‘गोल्ड घारी’ की दीवानगी, 21 हजार रुपए किलो कीमत; एडवांस बुकिंग कर रहे लोग | Surat Chandi Padwa Sweet Gold Ghari Price Rs 21000 Per Kg rise


सूरत के पारंपरिक त्योहार ‘चांदी पड़वा’ पर इस बार मिठास के साथ महंगाई का तड़का लगा है. सूरत की पहचान बन चुकी मशहूर ‘गोल्ड घारी’ की कीमत इस साल आसमान छूते हुए 21 हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में सीधे 5000 रुपए महंगी है. सूखे मेवों और सोने के बढ़ते दामों ने भले ही सामान्य और गोल्ड घारी दोनों को महंगा कर दिया हो, लेकिन सूरती कस्टमर्स का उत्साह कम नहीं हुआ है. त्योहार से पहले ही दुकानों पर एडवांस बुकिंग का तांता लगा है. इस बार पारंपरिक स्वाद के साथ कुनाफा और ब्लूबेरी जैसे 17 नए फ्यूजन फ्लेवर भी ग्राहकों को लुभा रहे हैं. साफ है कि जेब पर भारी पड़ने के बावजूद, सूरतवासी अपनी इस ऐतिहासिक स्वाद परंपरा से कोई समझौता करने के मूड में नहीं हैं.

21 हजार रुपए किलो गोल्ड घारी

इस साल 26 अक्टूबर को मनाए जाने वाले चांदी पड़वा को लेकर मिठाई की दुकानों पर तैयारियां जोरों पर हैं. सूरत की खास पहचान बन चुकी गोल्ड घारी की कीमत इस साल आसमान छू रही है. पिछले साल जिस गोल्ड घारी की कीमत 16,000 रुपये प्रति किलो थी, वह इस साल बढ़कर 21,000 रुपये प्रति किलो हो गई है. यानी एक ही साल में इसकी कीमत में 5,000 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है.

वहीं, दुकानदारों के मुताबिक ड्राई फ्रूट्स समेत अन्य सामग्री की बढ़ती कीमतों के चलते सामान्य घारी के दाम में भी पिछले साल की तुलना में लगभग 50 से 60 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, कीमतों में भारी उछाल के बावजूद गोल्ड घारी को लेकर ग्राहकों का उत्साह कम नहीं हुआ है. त्योहार से पहले ही लोग एडवांस बुकिंग करा रहे हैं. सूरत के साथ-साथ देश के दूसरे शहरों और विदेशों से भी इसकी मांग आने की बात दुकानदार बता रहे हैं. खास मेहमानों की खातिरदारी और परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए लोग इस खास घारी को खरीद रहे हैं. 

Surat Chandi Padwa Sweet Gold Ghari Price Rs 21000 Per Kg rise

17 फ्लेवर की घारी उपलब्ध 

इस बार मिठाई की दुकानों पर पारंपरिक घारी के साथ नए-नए प्रयोग भी देखने को मिल रहे हैं. ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग स्वाद और अनोखी वैरायटी तैयार की गई हैं. पार्ले पॉइंट स्थित ’24 कैरेट स्वीट्स’ में इस साल कुल 17 फ्लेवर की घारी उपलब्ध कराई गई हैं. इनमें कुनाफा, ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, अंजीर-अखरोट, केसर-पिस्ता, बादाम-पिस्ता, चीकू-चॉकलेट और चॉकलेट चिप्स जैसी वैरायटी शामिल हैं. इसके अलावा गोल्ड घारी भी ग्राहकों के बीच खास आकर्षण बनी हुई है.

पिछले साल गोल्ड घारी थी 18 हजार रुपए किलो

दुकान के मैनेजर प्रदीपभाई के मुताबिक, हर साल ग्राहक कुछ नया स्वाद चखना चाहते हैं. इसी मांग को ध्यान में रखते हुए इस बार नई वैरायटी तैयार की गई हैं. उन्होंने बताया कि पिछले साल गोल्ड घारी की कीमत 18,000 रुपये प्रति किलो थी, जिसे इस साल बढ़ाकर 21,000 रुपये किया गया है. उनके अनुसार, सामग्री और ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण है.  

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चांदी पड़वा की खरीदारी का क्रेज सिर्फ सूरत तक सीमित नहीं है. नवसारी से घारी खरीदने पहुंचीं ग्राहक ट्विंकल ने बताया कि चांदी पड़वा के मौके पर घारी खरीदना गुजरातियों के लिए खास परंपरा है. वह विशेष रूप से सूरत की अलग-अलग वैरायटी और स्वाद के कारण यहां आई हैं.  ट्विंकल के मुताबिक, दुकान पर उन्हें ब्लूबेरी, गोल्ड और अंजीर जैसी कई यूनिक वैरायटी देखने को मिलीं. उन्होंने इस बार नई कुनाफा घारी भी ट्राई की, जिसका स्वाद उन्हें काफी पसंद आया. उनका कहना है कि सूरत की घारी का स्वाद और यहां मिलने वाली अलग-अलग वैरायटी उन्हें यहां तक खींच लाई. सूरत की घारी अपने स्वाद और पारंपरिक बनाने के तरीके के लिए जानी जाती है. इसे शुद्ध घी में तैयार किया जाता है और इसके मावे में ड्राई फ्रूट्स तथा अन्य सामग्री मिलाई जाती है. केसर-पिस्ता और बादाम-पिस्ता जैसी पारंपरिक वैरायटी के साथ अब चॉकलेट और विदेशी मिठाइयों से प्रेरित फ्लेवर भी बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं.

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कैसे बनती है गोल्ड घारी

गोल्ड घारी को खास बनाने के लिए इसके ऊपर खाने योग्य सोने का वर्क लगाया जाता है. दुकानदार इसे पारंपरिक मिठाई को शाही अंदाज में पेश करने का एक तरीका बताते हैं. ‘राधा मिठाईवाला’ की संचालिका राधाबेन ने बताया कि पुराने समय में राजा-महाराजाओं के बीच स्वर्ण भस्म के इस्तेमाल की परंपरा का उल्लेख मिलता है. उसी शाही अवधारणा से प्रेरित होकर मिठाई में गोल्ड वर्क का प्रयोग किया गया है. हालांकि, सोने का वर्क लगा होने का मतलब यह नहीं है कि मिठाई से स्वास्थ्य लाभ साबित हो जाते हैं. घारी में कैलोरी और चीनी की मात्रा भी अधिक हो सकती है, इसलिए इसे स्वाद और त्योहार की परंपरा के तौर पर ही देखना बेहतर है.

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