
हर साल नवरात्रि पर्व के समापन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में दशहरा पर्व मनाया जाता है. इस साल विजयादशमी पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा. हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल विजयादशमी पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है. यही कारण है कि इसे विजयादशमी भी कहा जाता है.
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 मिनट पर होगा. दशहरा का त्योहार इस साल 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा. रावण दहन प्रदोष काल में किया जाता है.
दशहरा के दिन भगवान राम ने रावण का वध कर युद्ध में जीत हासिल की थी. इस पर्व को असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में भी मनाया जाता है. मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था, इसलिए भी शारदीय नवरात्र की दशमी तिथि को यह उत्सव मनाया जाता है. कई जगहों पर इस दिन मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन भी किया जाता है.
नीलकंठ पक्षी के दर्शन और खरीदारी का महत्व
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, हिंदू धर्म में दशहरा पर्व का विशेष महत्व है. देशभर में अलग-अलग जगह रावण दहन होता है और हर जगह की परंपराएं अलग हैं.
शुभ खरीदारी: इस दिन वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम, सोना, आभूषण और नए वस्त्र इत्यादि खरीदना बेहद शुभ होता है.
शमी व शस्त्र पूजा: इस दिन शस्त्रों और शमी के पेड़ की विशेष पूजा की जाती है.
नीलकंठ दर्शन: दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना अति शुभ माना जाता है. मान्यता है कि यदि इस दिन नीलकंठ पक्षी दिख जाए तो बिगड़े काम बन जाते हैं, पैसों और संपत्ति में बढ़ोतरी होती है और घर में खुशहाली आती है.
दशहरा तिथि व शुभ मुहूर्त
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि दशहरा पर्व के लिए प्रदोष काल और विजय मुहूर्त देखा जाता है, क्योंकि रावण दहन इसी मुहूर्त में करना शुभ माना गया है.
| विवरण | समय / अवधि |
| दशमी तिथि आरंभ | 20 अक्टूबर, दोपहर 12:50 बजे से |
| दशमी तिथि समापन | 21 अक्टूबर, दोपहर 02:11 बजे तक |
| शस्त्र पूजन मुहूर्त (विजय मुहूर्त) | दोपहर 01:59 से दोपहर 02:45 बजे तक (कुल अवधि: 47 मिनट) |
| रावण दहन मुहूर्त (प्रदोष काल) | शाम 05:47 बजे से |
कई तरीकों से मनाया जाता है दशहरा पर्व
डा. अनीष व्यास ने बताया कि अलग-अलग जगहों पर दशहरे का त्योहार अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है:
- शस्त्र का प्रयोग करने वाले समुदाय इस दिन शस्त्र पूजन करते हैं.
- कई लोग इस दिन अपनी पुस्तकों, बहीखातों और वाहनों की पूजा करते हैं.
- किसी नए काम की शुरुआत के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है.
- कई स्थानों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों के दहन के बाद घर लौटने पर महिलाएं पुरुषों की आरती उतारती हैं और तिलक लगाती हैं.
मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त, लेकिन विवाह वर्जित
विजयादशमी को सर्वसिद्धिदायक तिथि माना जाता है, इसलिए इस दिन किए गए सभी शुभ कार्य फलकारी होते हैं.
शुभ कार्य: बच्चों का अक्षर लेखन, गृह या दुकान निर्माण, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, अन्नप्राशन, कर्ण छेदन, यज्ञोपवीत संस्कार और भूमि पूजन आदि कार्य इस दिन किए जा सकते हैं.
वर्जित कार्य: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विजयादशमी के दिन विवाह संस्कार को निषेध माना गया है.
विजयादशमी पूजन विधि
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास के अनुसार दशहरे के दिन पूजन इस विधि से करें:
- सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
- गेहूं या चूने से दशहरे की प्रतिमा बनाएं.
- गाय के गोबर से 9 गोले और 2 कटोरियां बनाएं. एक कटोरी में सिक्के और दूसरी कटोरी में रोली, चावल, जौ व फल रखें.
- प्रतिमा को केले, जौ, गुड़ और मूली अर्पित करें. बहीखातों या शस्त्रों की पूजा करते समय भी यह सामग्री जरूर अर्पित करें.
- सामर्थ्य अनुसार दान-दक्षिणा दें और जरूरतमंदों को भोजन कराएं.
- रावण दहन के उपरांत शमी वृक्ष की पत्तियां अपने परिजनों को भेंट करें और बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें.
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