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जब इस एक्ट्रेस के आते ही पतियों को छिपा लेती थीं महिलाएं! ‘मोनिका डार्लिंग’ के पीछे छिपी थी 8 भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठाने वाली बेटी की कहानी | Monica Darling success story women hide their husbands from her to daughter who took responsibility of supporting 8 siblings


नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में 70 के दशक की जब बात होती है तो शर्मिला टैगोर, आशा पारेख, जया भादुड़ी और हेमा मालिनी जैसी टॉप एक्ट्रेसेस की बात होती है, जिन्होंने स्क्रीन पर राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, देव आनंद और दिलीप कुमार जैसे सुपरस्टार्स के साथ रोमांस करके अपनी एक पहचान हासिल की. लेकिन जब बात बॉलीवुड में कुछ चेहरों की हो रही है,  जिन्होंने पर्दे पर अपनी मौजूदगी से हीरो और हीरोइन तक को पीछे छोड़ दिया तो एक्ट्रेस बिंदु का नाम जरुर आता है, जिनकी अदाएं, बोल्ड अंदाज और निगाहों के जादू ने दर्शकों को दीवाना बना दिया. जबकि महिलाएं उन्हें अपने पति के आसपास भी आने नहीं देती थीं और छिपा लेती थीं. हालांकि इसने उन्हें हिंदी सिनेमा में खलनायिका और ग्लैमरस किरदारों की पहचान दे दीं, जिनकी असल जिंदगी संघर्ष, जिम्मेदारी और अपने दम पर मुकाम बनाने की थी. 

8 भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं बिंदु

एक्ट्रेस बिंदु का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जहां कला और सिनेमा का माहौल पहले से मौजूद था. उनके पिता नानूभाई देसाई एक फिल्म निर्माता थे. जबकि मां ज्योत्सना स्टेज आर्टिस्ट का काम करती थीं. बिंदु सात बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी थी, जिसके चलते 8 भाई-बहनों की जिम्मेदारी उन्होंने खुद उठाई क्योंकि पिता के निधन के बाद उनके परिवार पर मुश्किलों का पहाड़ टूट गया था. बिंदु के कंधों पर कम उम्र में ही घर की जिम्मेदारियां आ गईं. परिवार की आर्थिक मदद के लिए उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में करियर शुरू किया और फिर उनके संघर्ष का दौर शुरू हुआ.  

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मॉडलिंग के बाद फिल्मों का सफर

मॉडलिंग में करियर शुरू कर चुकीं बिंदु ने साल 1962 में आई फिल्म ‘अनपढ़’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की. इस फिल्म में उन्होंने माला सिन्हा की बेटी का किरदार निभाने को मिला. हालांकि, उन्हें हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए अभी लंबा सफर तय करना था. इसके बाद 1969 में आई ‘दो रास्ते’ और ‘इत्तेफाक’ जैसी फिल्मों ने उनके करियर को आगे बढ़ाने का काम किया. साल 1970 में ‘कटी पतंग’ रिलीज हुई, जिसने उनके एक्टिंग करियर को एक नई पहचान दी. इसके बाद वह ऐसे किरदारों के लिए पहचानी जाने लगी, जिसमें ग्लैमर, आत्मविश्वास और बेबाकी नजर आती थी.

‘जंजीर’ की मोना डार्लिंग बन छाईं

बिंदु के करियर का टर्निंग प्वॉइंट 1973 में आई अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘जंजीर’ थी, जिसमें उन्होंने मोना डार्लिंग का आइकॉनिक किरदार निभाया और दर्शकों का ध्यान खींचा. आज मोना डार्लिंग का नाम हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय फिल्मी पहचान का हिस्सा बन गया. उस दौर में जब एक्ट्रेसेस के लिए ग्लैमरस और नकारात्मक किरदार निभाना आसान नहीं था तब बिंदु ने अपनी स्क्रीन इमेज को ही अपनी ताकत बना लिया. हालांकि दर्शकों के बीच वह नफरत के लिए जानी जाती थीं. बिंदू के किरदारों का उनकी पर्सनल लाइफ पर ऐसा असर पड़ा कि महिलाएं अपने पतियों को उनसे छिपाने लगीं. इसका जिक्र वह खुद कई बार कर चुकी हैं. 

15 साल की उम्र में प्यार और शादी

एक्ट्रेस बिंदु की प्रोफेशनल लाइफ जितनी चर्चा का विषय रही. उतनी ही उनकी निजी जिंदगी दिलचस्प रही. कहा जाता है कि लगभग 15 साल की उम्र में बिंदू को अपने पड़ोसी और कारोबारी चंपकलाल झवेरी से प्यार हो गया था. हालांकि परिवार इसके लिए तैयार नहीं था. लेकिन उन्होंने विरोध के बावजूद शादी की. शुरुआत से बिंदु की शादी प्राइवेट थी. हालांकि उनके पति ने उनके एक्टिंग करियर का सपोर्ट किया. इसी का असर था कि वह पर्दे पर नेगेटिव किरदार निभाती रहीं. कहीं सौतन, कहीं गर्लफ्रेंड तो कभी खड़ूस सास के किरदार में उन्होंने दर्शकों के दिलो दिमाग पर ऐसी छाप छोड़ी कि लोग उनसे नफरत करने लगे. लेकिन बिंदू ने कहा था-‘गालियां ही मेरे अवॉर्ड थीं’.

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