मध्य प्रदेश

हिमाचल: अवैध खनन पर लगाम लगाने की तैयारी तेज, अलग निदेशालय का हुआ गठन


हिमाचल प्रदेश में खनन गतिविधियों के बेहतर प्रबंधन, राजस्व बढ़ाने और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए उद्योग विभाग से अलग स्वतंत्र खनन निदेशालय (Directorate of Mines) का गठन किया गया है. उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार खनन गतिविधियों पर विशेष ध्यान दे रही है. सरकार का उद्देश्य खनन से राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाना है.

उद्योग मंत्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में करीब 450 क्रशर और खनन इकाइयां हैं, जिनमें से लगभग 25 हमेशा बंद रहती हैं. वर्तमान में करीब 300 से 350 क्रशर और खनन इकाइयां चालू हालत में हैं. उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में हिमाचल प्रदेश में खनन गतिविधियां कम हैं. सरकार खनन क्षेत्र को व्यवस्थित करने और नियमों के तहत गतिविधियों को संचालित करने की दिशा में काम कर रही है.

वन क्षेत्र में खनन की अनुमति बड़ी चुनौती

हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि वन क्षेत्रों में खनन से जुड़े मामलों को वन विभाग देखता है. ऐसे मामलों में वन संरक्षण अधिनियम (FCA) भी एक बड़ी चुनौती है. वहीं, निजी भूमि पर खनन की अनुमति के लिए निर्धारित नियम बनाए गए हैं और उन्हीं के तहत स्वीकृति प्रदान की जाती है. सरकार की कोशिश है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए खनन गतिविधियों का बेहतर प्रबंधन किया जाए और अवैध खनन पर रोक लगे.

नई उद्योग नीति से निवेश बढ़ाने की तैयारी

उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जल्द ही नई उद्योग नीति लागू करने जा रही है. इसके माध्यम से हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर उद्योगों को आकर्षित करने की योजना है. उन्होंने कहा कि उद्योगों को प्रदेश में बनाए रखने और नए निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि कुछ अन्य राज्य उद्योगपतियों को अधिक राहत और सुविधाएं दे रहे हैं, जिसके कारण भी उद्योग दूसरे राज्यों का रुख करते हैं. उद्योगों के बंद होने के पीछे अलग-अलग कारण होते हैं, इसलिए इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय वास्तविक परिस्थितियों को समझने की जरूरत है. सरकार प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है.

हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने के मुद्दे पर हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि इस संबंध में कमेटी गठित की गई है. कमेटी की रिपोर्ट आने और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के कार्यकाल में भी नए जिले बनाने की कवायद शुरू हुई थी. ऐसे में बीजेपी को इस विषय पर राजनीति करना शोभा नहीं देता.

सरकार जनहित के कार्यों पर देगी ध्यान

कांग्रेस सरकार के कार्यक्रमों और योजनाओं को लेकर बीजेपी की ओर से की जाने वाली आलोचना पर उद्योग मंत्री ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार के कार्यों की आलोचना करना है. बीजेपी कांग्रेस के कार्यक्रमों की तारीफ नहीं करेगी, लेकिन सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जनहित के कार्य करती रहेगी. उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान प्रदेश के विकास, उद्योगों को बढ़ावा देने और जनता के हित में फैसले लेने पर है.

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