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फोर्ट हूड हमले के दोषी निदाल हसन की फांसी पर ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, अब नहीं होगा लाइव प्रसारण | Trump Cancels Live Broadcast Of Fort Hood Shooter Nidal Hasan Execution Despite Initial Plans


अमेरिका में फोर्ट हूड नरसंहार के दोषी पूर्व सैन्य अधिकारी निदाल मलिक हसन को तय कार्यक्रम के अनुसार फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मौत की सजा दी जाएगी, लेकिन पूरी दुनिया को इसका लाइव प्रसारण नहीं दिखाया जाएगा. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की उस योजना को रद्द कर दिया है, जिसमें हसन की फांसी का लाइवस्ट्रीम करने की बात कही गई थी.

ट्रंप ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि फांसी का प्रसारण दुनिया को यह दिखाने के लिए एक मजबूत संदेश हो सकता था कि अमेरिका आतंकवादियों और ऐसे अपराधियों से कैसे निपटता है. हालांकि उन्होंने कहा कि कई अच्छे और संवेदनशील लोग ऐसा दृश्य नहीं देखना चाहते, इसलिए इस घटना का लाइव प्रसारण नहीं किया जाएगा.

‘देशद्रोही था निदाल मलिक हसन’

अपने पोस्ट में ट्रंप ने निदाल मलिक हसन को ‘देशद्रोही’ और ‘बेहद बुरा और खतरनाक व्यक्ति’ बताया. उन्होंने कहा कि हसन ने 2009 में टेक्सास स्थित फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर 13 लोगों की हत्या कर दी थी. मृतकों में एक गर्भवती महिला सैनिक भी शामिल थी. इसकी मौत उसके अजन्मे बच्चे के साथ हुई. इस हमले में 32 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि हमले से पहले हसन और कट्टरपंथी मौलवी अनवर अल-अवलाकी के बीच ईमेल संपर्क की जानकारी एफबीआई को मिली थी, लेकिन जांचकर्ताओं ने इन संदेशों को खतरा नहीं माना. बाद में इस आकलन को अमेरिकी खुफिया तंत्र की बड़ी विफलताओं में से एक माना गया.

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कब होगी फांसी?

राष्ट्रपति ने साफ किया कि 3 दिसंबर को होने वाली फांसी तय कार्यक्रम के अनुसार फायरिंग स्क्वॉड से ही होगी, लेकिन इसका प्रसारण किसी भी प्लेटफॉर्म पर नहीं किया जाएगा. हालांकि पीड़ितों के करीबी परिजनों को, यदि वे चाहें, तो फांसी को प्रत्यक्ष रूप से देखने की अनुमति दी जाएगी.

ट्रंप ने कहा कि पीड़ित परिवार न्याय होते देखना चाहते हैं और वे इसके हकदार हैं.

क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर निदाल हसन को 2013 में मौत की सजा सुनाई गई थी. उस पर 2009 में फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर गोलीबारी कर 13 लोगों की हत्या और 32 लोगों को घायल करने का दोष साबित हुआ था.

ट्रंप का यह फैसला उस समय आया है जब रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के नेताओं ने फांसी के लाइव प्रसारण के प्रस्ताव पर सवाल उठाए थे. आलोचकों का कहना था कि सार्वजनिक प्रसारण से हसन को वैसी शहादत की छवि मिल सकती है, जिसकी वह खुद इच्छा रखता था. कई लोगों ने इसे अमेरिकी मूल्यों के भी खिलाफ बताया.

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