

दूरदर्शन का वो दौर याद है, जब टीवी पर कोई कार्यक्रम देखने के लिए पहले से समय पता होता था. सुबह-सुबह एक महिला पारंपरिक साड़ी पहनकर स्क्रीन पर आती थीं और अपनी मीठी आवाज में बताती थीं कि दिनभर दूरदर्शन पर क्या-क्या दिखाया जाएगा. उनकी अनाउंसमेंट से घरों में टीवी देखने का पूरा शेड्यूल बन जाता था. किस समय समाचार आएंगे, कौन सा नाटक दिखाया जाएगा और किस वक्त फिल्म देखने को मिलेगी, यह सब पहले ही पता चल जाता था. उस दौर में न मोबाइल था, न ओटीटी और न ही टीवी गाइड की इतनी सुविधा. दूरदर्शन की ये घोषणाएं आज भी 90 के दशक की यादें ताजा कर देती हैं.
सुबह की शुरुआत समाचार और पुराने गानों से होती थी
उस समय दूरदर्शन पर दिन की शुरुआत सुबह 7 बजे समाचार से होती थी. इसके बाद 7:15 बजे पुराने फिल्मी गाने सुनने का मौका मिलता था. सुबह 7:45 बजे वैरायटी कार्यक्रम आता था, जबकि 8 बजे ‘द ब्रेकफास्ट शो’ प्रसारित होता था. 8:15 बजे फिर समाचार सुनाए जाते थे. सुबह 9 बजे अंग्रेजी सीरियल ‘मार्को पोलो’ और 9:30 बजे ‘दूसरा केवल’ देखने को मिलता था. इसके बाद 10 बजे म्यूजिकल वैरायटी कार्यक्रम आता था. इस तरह सुबह का समय समाचार, संगीत और मनोरंजन के नाम रहता था. लोग अपनी पसंद के कार्यक्रम के हिसाब से घर के काम निपटाते थे.
दोपहर में फिल्में और शाम को मनोरंजन का इंतजार
दोपहर के कार्यक्रमों का भी अपना अलग आकर्षण था. 12 बजे ‘लोक मंगल’ प्रसारित होता था, जबकि 12:30 बजे ‘सबक’ नाम का टेलीफिल्म कार्यक्रम आता था. दोपहर 1:30 बजे पश्चिमी संगीत सुनने का मौका मिलता था. 2 बजे समाचार और 2:10 बजे हिंदी फीचर फिल्म दिखाई जाती थी. इसके बाद 3 बजे अंग्रेजी समाचार प्रसारित होते थे.
शाम होते ही टीवी देखने का उत्साह बढ़ जाता था. शाम 7 बजे ‘तृष्णा’ और 7:25 बजे उर्दू खबरें आती थीं. 7:30 बजे ‘वर्ल्ड म्यूजिक अवॉर्ड’ का कार्यक्रम प्रसारित होता था. वहीं, रात 8 बजे ‘जेमी एंड द मैजिक टॉर्च’ और 8:15 बजे ‘जुबान संभाल के’ जैसे कार्यक्रम दर्शकों का मनोरंजन करते थे.
रात के कार्यक्रमों के लिए रहता था खास उत्साह
रात 8:45 बजे ‘मिर्च मसाला’ और 9:45 बजे समाचार प्रसारित होते थे. इसके बाद रात 10 बजे ‘फ्लॉप शो’ देखने का मौका मिलता था. जसपाल भट्टी का यह कॉमेडी शो अपनी अलग पहचान रखता था. रात 10:30 बजे ‘यूरो टॉप’ और 10:40 बजे अंग्रेजी फिल्म ‘ड्राइविंग मिस डेजी’ दिखाई जाती थी.
उस दौर में टीवी देखना सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि परिवार के साथ समय बिताने का एक जरिया था. कार्यक्रमों का समय पहले से पता होने के कारण लोग अपने काम उसी हिसाब से करते थे. आज एक क्लिक पर हजारों फिल्में और शो देखे जा सकते हैं, लेकिन दूरदर्शन की उस अनाउंसमेंट का इंतजार, महिला की सुरीली आवाज और उनका मुस्कुराकर नमस्ते कहना आज भी लोगों के दिलों में बसा है.
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