

कुछ गाने देश के कई प्रोटेस्ट का का एंथम रहे हैं. ऐसा ही एक गाना है जो सालों से ईमानदारी की सीख देता आया है और बुरे वक्त से निकलने के लिए प्रेरित करता है. इस गाने की आवाज विरोध प्रदर्शन में भी सुनने की आवाज मिलती है. इस गाने का नाम ‘हम होंगे कामयाब एक दिन’ है. यूं तो यह गाना काफी साल पुराना है लेकिन इस फिल्म में 43 साल पहले लिया गया था. जिस फिल्म में इसे लिया गया था उसका नाम जाने भी दो यारो है.
कौन सी फिल्म का है गाना
यह फिल्म साल 1983 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. फिल्म के अंदर यह गाना दो फोटोग्राफरों की आशाओं को बयां करता है, जो अंत में सिस्टम के सामने टूट जाती हैं. 1983 में कुंदन शाह के निर्देशन में बनी यह फिल्म एनएफडीसी द्वारा निर्मित थी. बजट मात्र करीब 7-9 लाख रुपये था. जाने भी दो यारो में नसीरुद्दीन शाह, रवि बासवानी, भक्ति बर्वे, सतीश शाह, ओम पुरी,पंकज कपूर, सतीश कौशिक और नीना गुप्ता जैसे कलाकार थे.
अमेरिका की क्रांति से निकला गाना
फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफल नहीं हुई, लेकिन बाद में कल्ट क्लासिक बन गई. गाना मूल रूप से अमेरिकी सिविल राइट्स एंथम ‘We Shall Overcome’ का हिंदी अनुवाद है, जिसे कवि गिरिजा कुमार माथुर ने लिखा. फिल्म में संगीत वनराज भाटिया का है.
गिरिजा कुमार माथुर ने 1960 के दशक में ‘We Shall Overcome’ का हिंदी रूपांतरण किया. यह गाना भारत में प्रेरणा और विरोध दोनों का प्रतीक बना. फिल्म में यह लेटमोटिफ है. जाने भी दो यारो में दो किरदार शुरू में इसे आशा से गाते हैं.
नसीरुद्दीन शाह की सैलरी
नसीरुद्दीन शाह को सिर्फ 15,000 रुपये मिले. कई कलाकारों को बहुत कम फीस या किश्तों में पैसे मिले. शूटिंग में पैसे की कमी इतनी थी कि कलाकारों को खुद टिकट खरीदकर प्रीमियर देखना पड़ा. फिल्म सिर्फ कुछ थिएटरों में रिलीज हुई. बाद में डीडी मेट्रो पर बार-बार दिखाए जाने से इसकी लोकप्रियता बढ़ी. 2012 में डिजिटली रिस्टोर्ड वर्जन फिर से रिलीज हुआ.
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