धर्म

Adhik Mas Mela: अलीगढ़ में है पृथ्वी का ‘नाभि केंद्र’ वेद-पुराणों में दर्ज है इस तीर्थ का इतिहास, अधिक मास में उमड़ा आस्था का जनसैलाब


Adhik Mas Mela: ताले और तालीम की नगरी के रूप में मशहूर उत्तर प्रदेश का अलीगढ़ जिला इन दिनों पूरी तरह से भक्ति के रंग में सराबोर है. अलीगढ़ सिर्फ उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन और पौराणिक तीर्थ स्थलों के लिए भी जाना जाता है. इन्हीं में से एक बेहद खास तीर्थ स्थल ऐसा भी है, जिसे ‘पूरी पृथ्वी का नाभि केंद्र’ माना जाता है.

वेद-पुराणों में दर्ज इस ऐतिहासिक स्थल पर इन दिनों वृंदावन जैसा नजारा देखने को मिल रहा है. अधिक मास (मलमास) के पावन अवसर पर यहाँ हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. मान्यता है कि यहाँ मौजूद पवित्र सरोवर में केवल स्नान करने से ही भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं.

महर्षि विश्वामित्र की यज्ञ भूमि और पृथ्वी का ‘नाभि केंद्र’

यह पूरा मामला अलीगढ़ जिले की तहसील इगलास के बेसवा में स्थित ‘धरणीधर सरोवर’ का है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस धरती का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है:

  • पृथ्वी की शांति के लिए यज्ञ: पौराणिक काल में महर्षि विश्वामित्र ने पृथ्वी की शांति के लिए इसी भूमि पर एक विशाल यज्ञ किया था.
  • तीन राक्षसों का वध: जब असुरों ने महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ में व्यवधान डालने का प्रयास किया, तब इसी पावन भूमि पर तीन राक्षसों का वध किया गया था.
  • वेद-पुराणों में महत्व: धार्मिक ग्रंथों में इस स्थान को पृथ्वी का नाभि केंद्र बताया गया है, जिसके कारण इसकी महत्ता अन्य तीर्थों से कहीं अधिक है.

सरकार की योजना: धरणीधर सरोवर की इसी अपार महिमा और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए वर्तमान सरकार ने इसके सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपए के बजट का आश्वासन दिया है. इस भव्य तीर्थ स्थल को और अधिक विकसित करने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.

कलयुग के ‘श्रवण कुमार’: 100 वर्षीय बुजुर्ग मां को कंधों पर बैठाकर कराई परिक्रमा

इस मेले के दौरान आस्था की कई अद्भुत तस्वीरें सामने आ रही हैं. जहाँ एक ओर युवा 3 से 4 घंटे की कठिन दंडवत परिक्रमा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यहाँ कलयुग के ‘श्रवण कुमार’ भी देखने को मिले.

ग्राम तेहरा मूँज के रहने वाले दो भाई, अशोक और उनके बड़े भाई अपनी 100 वर्ष से अधिक उम्र की बुजुर्ग माता जी को अपने कंधों पर बैठाकर धरणीधर सरोवर की परिक्रमा करा रहे हैं.

“मेरे बेटों ने श्रवण कुमार की तरह फर्ज निभाया”

जब एक भाई कंधे पर बैठाकर चलते-चलते थक जाता, तो दूसरा भाई माँ को अपने कंधे पर उठा लेता. इस भावुक कर देने वाले दृश्य को देखकर वहाँ मौजूद हर श्रद्धालु की आँखें नम हो गईं और सभी ने दोनों भाइयों की जमकर सराहना की.

इस दौरान जब 100 वर्षीय बुजुर्ग माता जी से बात की गई, तो उन्होंने बेहद खुश होकर कहा:

“मेरे चार बेटे हैं, जिनमें से दो घर पर हैं और ये दो बेटे मुझे यहाँ लेकर आए हैं. मेरी इच्छा थी कि मैं धरणीधर सरोवर की परिक्रमा करूँ, लेकिन कमजोरी के कारण चल नहीं सकती थी. मेरे इन बेटों ने श्रवण कुमार की तरह मुझे कंधों पर बैठाकर परिक्रमा कराई है. मैं बहुत खुश हूँ और मुझे बहुत आनंद आ रहा है.”

वृंदावन की तर्ज पर भव्य मेला और कड़े सुरक्षा इंतजाम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास के दौरान यहाँ वृंदावन की तर्ज पर ही एक विशाल और भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. दूर-दराज से लोग आकर इस मेले का हिस्सा बनते हैं.

  • प्रशासनिक व्यवस्था: भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखा गया है ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो.
  • रोशनी से जगमगाया सरोवर: पूरे धरणीधर सरोवर को आधुनिक और आकर्षक लाइटिंग से सजाया गया है, जिससे रात के समय यहाँ का नजारा अलौकिक प्रतीत होता है.

अपनी अपार आध्यात्मिक शक्तियों और पौराणिक इतिहास के कारण बेसवा का यह धरणीधर सरोवर आज लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र बन चुका है.

ये भी पढ़ें: Kal Ka Rashifal 12 June 2026: वृश्चिक राशि के स्टार्टअप को मिलेंगे बड़े इन्वेस्टर्स, तो तुला राशि के जातकों की इंटरनेशनल मार्केट में होगी बड़ी डील!

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button