

चाहें आप हों या हम, कईयों को जमीन पर मकड़ी देखकर डर लगता है. अगर ऐसा है तो जरा समुद्र की इन मकड़ियों के बारे में सोचिए. वैज्ञानिकों ने समुद्र की गहराई में मकड़ी की दो नई प्रजातियां खोजी हैं. एक अपने पैरों पर मौजूद कंघी जैसे कांटों से खुद को साफ करती है, तो दूसरी खुद पर ही छोटे-छोटे परजीवियों को ढोती रहती है. दोनों की बनावट भी इतनी अलग है कि वैज्ञानिकों ने इन्हें नई प्रजातियों के तौर पर पहचाना है.
CNN की रिपोर्ट के अनुसार कनाडा के वैज्ञानिकों ने सितंबर 2023 से अगस्त 2024 के बीच स्कूबा डाइविंग के दौरान इन दोनों प्रजातियों को खोजा. यह खोज 18 मीटर यानी करीब 59 फीट की गहराई तक की गई. यह इलाका कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत और अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य के बीच स्थित सालिश सागर में है.
पहली मकड़ी के तीन होंठ
इनमें से पहली मकड़ी की प्रजाति का नाम कैलिपैलेन पिलोससपेडेस रखा गया है. इसकी निचली टांगों पर लंबे और मुड़े हुए कांटे जैसे बाल हैं. इसके नाम में ‘पिलोसस’ लैटिन भाषा का शब्द है, जिसका मतलब ‘बालों वाला’ होता है, जबकि ‘पेडेस’ का मतलब ‘पैर’ है. इस मकड़ी का शरीर पतला है. इसकी आंखें लाल हैं और इसके त्रिकोण जैसे मुंह के पास तीन होंठ हैं. इसके पंजे भी होते हैं. लेकिन इसकी सबसे खास चीज इसकी टांग जैसी संरचनाएं हैं, जिनका इस्तेमाल चलने के लिए नहीं होता. इन्हें ओविजर्स कहा जाता है.
दूसरी मकड़ी के पेट और पंजे बड़े अलग
दूसरी नई प्रजाति का नाम टैनिस्टाइलम कीइक्सिन है. इसके अंडे ले जाने वाले अंग पहली प्रजाति के मुकाबले काफी छोटे और कम लचीले हैं. इसलिए यह मकड़ी खुद को प्रभावी तरीके से साफ नहीं कर पाती. इसके नाम में ‘कीइक्सिन’ शब्द की आवाज समुद्र की उन लहरों से जुड़ी है, जो उस जगह के आधार से टकराती हैं जहां एक प्राचीन स्थानीय समुदाय का गांव हुआ करता था.
रिपोर्ट के अनुसार इस मकड़ी का पेट घंटे के आकार जैसा है. इसकी आंखें काली हैं और पंजे गांठ जैसे दिखाई देते हैं. यह मकड़ी खुद एक परजीवी है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे अक्सर छोटे-छोटे परजीवियों से भी ढका हुआ पाया. वैज्ञानिकों के मुताबिक अब तक समुद्री मकड़ियों की करीब 1,400 प्रजातियां पहचानी जा चुकी हैं. माना जाता है कि समुद्री मकड़ियां करीब 50 करोड़ साल पहले अस्तित्व में आई थीं.





