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बिजली मिस्त्री से मास्टरशेफ जज बनने का सफर: एंडी एलन की दिल छू लेने वाली कहानी | Andy Allen Success Story Masterchef Australia Judge Three Blue Ducks


जिंदगी कभी कभी ऐसे मोड़ पर ले आती है जहां से सब कुछ बदल जाता है. बस एक फैसला, और आपकी पूरी दुनिया नई हो जाती है. एंडी एलन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. जब वे सिर्फ 23 साल के थे, तब हाथों में तारों और प्लास को छोड़कर उन्होंने कुकिंग की दुनिया में कदम रखा था. उस वक्त न्यूकैसल में बिजली मिस्त्री यानी इलेक्ट्रीशियन का काम उनका इंतजार कर रहा था.

किसी ने सोचा भी नहीं था कि तारों को जोड़ने वाला यह लड़का एक दिन जायकों को ऐसे जोड़ेगा कि दुनिया देखती रह जाएगी. आज एक दशक से भी ज्यादा समय बीत चुका है. वे न केवल मास्टरशेफ ऑस्ट्रेलिया के विनर रहे, बल्कि उसी शो में जज की कुर्सी पर भी बैठे और कई मशहूर रेस्तरां के मालिक बने.

कच्ची उम्र और सीखने की भूख

साल 2012 में जब एंडी ने पहली बार मास्टरशेफ के किचन में कदम रखा, तो वे बिल्कुल नए थे. न सिर पर परिवार की कोई भारी जिम्मेदारी थी, न कोई बड़ा कर्ज और न ही कोई ऐसी नौकरी जिससे दिल लगा हो. यही वजह थी कि वे बिना किसी डर के इस आग में कूद पड़े. एंडी खुद बताते हैं कि वे उस वक्त बहुत नौसिखिए थे, पर दिल में कुछ नया सीखने की जबरदस्त चाहत थी.

मजे की बात यह है कि एंडी खुद को कभी उस सीजन का सबसे बेहतरीन कुक नहीं मानते. उनका मानना है कि उनकी जीत की असली वजह यह नहीं थी कि वे सबसे अच्छा खाना बनाते थे. बल्कि वजह यह थी कि वे भारी दबाव को बहुत खूबसूरती से झेलना जानते थे. जब बाकी लोग घबरा जाते, तब वे शांत रहकर अपनी डिश पर ध्यान लगाते थे.

कंटेस्टेंट से जज बनने का सफर

सालों बाद जब एंडी उसी शो में जज बनकर लौटे, तो जज्बात बिल्कुल अलग थे. जिस जगह खड़े होकर कभी उनके हाथ कांपते थे, आज उसी जगह बैठकर दूसरों के सपनों को परखना था. एंडी कहते हैं कि कंटेस्टेंट रहने के दौरान उन्हें तरह तरह की सामिग्री, अलग संस्कृतियों और कुकिंग की बारीकियों को सीखने में मजा आता था.
 

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Photo Credit: Instagram/MasterChef Australia

मगर जज बनना इतना आसान नहीं होता:

  • जज की कुर्सी पर बैठकर लिया गया एक छोटा सा फैसला किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है.
  • कंटेस्टेंट की आंखों में दिखती उम्मीदें दिल को छू जाती हैं.
  • प्लेट में परोसे गए खाने को देखकर यह तय करना पड़ता है कि किसका सफर यहीं खत्म होगा.

एंडी और उनके साथी जजों का एक ही नियम रहता है. वे कहते हैं कि हम कभी किसी इंसान को बाहर नहीं निकालते, हम सिर्फ उस प्लेट की डिश को बाहर करते हैं. इस सोच ने उनके दिल के बोझ को थोड़ा हल्का जरूर किया, पर दर्द फिर भी बना रहता है.
 

जब शो खत्म हुआ और अंधेरा छाने लगा

मास्टरशेफ जीतने के बाद असली इम्तेहान शुरू हुआ. जब शो की चकाचौंध खत्म हो गई, अखबारों में नाम छपना बंद हुआ और अगले सीजन का नया विनर आ गया, तब एंडी के सामने सन्नाटा था. उनके मन में ख्याल आया कि सब छोड़कर वापस न्यूकैसल लौट जाएं और वही पुरानी बिजली मिस्त्री की नौकरी पकड़ लें.

लेकिन उनका दिल तो अब चूल्हे की आंच और मसालों की खुशबू में बस चुका था. उन्होंने हार नहीं मानी और तय किया कि वे खाने की दुनिया को और गहराई से समझेंगे.

एक दरवाजे पर दस्तक और नया मोड़

इसी चाहत ने उन्हें ‘थ्री ब्लू डक्स’ रेस्तरां तक पहुंचाया. वे सीधे उनके दरवाजे पर पहुंच गए. उन्होंने बिना किसी हिचक के कहा कि क्या आपने मुझे मास्टरशेफ में देखा था, मुझे बस आपके साथ काम सीखना है.

दो हफ्ते का बिना तंख्वाह का अनुभव जल्द ही पक्की नौकरी में बदल गया. कुछ ही महीनों बाद उन्हें रोजबेरी में 230 सीटों वाले एक बड़े रेस्तरां का हेड शेफ बनने का मौका मिला. एंडी बेहद डरे हुए थे, क्योंकि उन्होंने कभी इतने बड़े लेवल पर काम नहीं किया था. मगर उन्होंने खुद को साबित किया और 2015 में वे उस बिजनेस के हिस्सेदार बन गए.

जमीन से जुड़ा खाना और नई शुरुआत

आज एंडी का सफर बहुत आगे निकल चुका है. उनका नया प्रोजेक्ट एनएसडब्ल्यू सदर्न हाइलैंड्स के बुराडू पार्क फार्म में है. यह 1823 का एक पुराना फार्महाउस है, जिसके चारों तरफ 600 एकड़ की हरी भरी जमीन है.

इस रेस्तरां की खासियत दिल को छू लेने वाली है:

  • यहां का मेन्यू तय नहीं रहता, जो खेत में उगता है वही प्लेट में सजता है.
  • ताजी सब्जियां, खेत की मिट्टी की महक और शुद्धता ही इसका असली स्वाद है.
  • खाने की बर्बादी को पूरी तरह से रोका जाता है.

भारत आने का सपना

एंडी अब अपने काम को धीरे धीरे पूरी दुनिया में फैलाना चाहते हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे कभी भारत में अपना कोई रेस्तरां खोलेंगे, तो उनकी आंखों में एक चमक आ गई. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वे भारत के लिए कभी ना नहीं कहेंगे. भारत का खाना और यहां के मसाले उन्हें हमेशा से खींचते रहे हैं.

पीछे मुड़कर देखने पर एंडी को यकीन नहीं होता कि जिंदगी उन्हें कहां से कहां ले आई. वे भावुक होकर कहते हैं कि मास्टरशेफ ने उन्हें वह सब कुछ दिया जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. अगर उस दिन उन्होंने वह फॉर्म न भरा होता, तो शायद आज वे किसी स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहे होते या बिजली के तार ठीक कर रहे होते. खाने से जुड़े उनके इस जुनून ने न सिर्फ उनकी किस्मत बदली, बल्कि यह भी सिखाया कि अगर दिल में सीखने की भूख हो, तो कोई भी रास्ता मुश्किल नहीं होता.






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