

जेनेवा में UN मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र में बारामूला की एक युवा कश्मीरी महिला ने पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में निहत्थे नागरिकों के बेरहम दमन और हत्या को लेकर इस्लामाबाद की कड़ी आलोचना की है. नॉर्थ कश्मीर की रहने वाली तस्लीमा अख्तर ने PoJK में बिगड़ते मानवाधिकार हालात पर गंभीर चिंता जताई और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर उन नागरिकों की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगाया, जो शांतिपूर्ण तरीके से अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे थे. तस्लीमा ने कहा, “हर हत्या की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और सभी मामलों से जुड़ी जानकारी तक निष्पक्ष पहुंच होनी चाहिए.”
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान सरकार ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया, इंटरनेट बंद कर दिया और हिंसक झड़पें हुईं जिनमें दर्जनों लोगों की जान चली गई, जिससे PoJK में राजनीतिक अस्थिरता और जनता में असंतोष उजागर बढ़ा.”
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‘हत्याओं को तुरंत रोका जाना चाहिए…’
नागरिकों के लिए किसी भी तरह की आजादी या जगह न होने की बात उठाते हुए, उन्होंने UNHRC से तुरंत दखल देने की मांग की. उन्होंने कहा, “PoJK में नागरिकों के लिए कोई जगह नहीं है. पाकिस्तानी सेना द्वारा बड़े पैमाने पर बदले की कार्रवाई और बेगुनाह नागरिकों की हत्याओं को तुरंत रोका जाना चाहिए. नागरिकों के लिए आजादी और संचार व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए और हर हत्या की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.”
जम्मू-कश्मीर से तुलना करते हुए, तस्लीमा ने इस केंद्र शासित प्रदेश के विकास की कहानी बताई. उन्होंने कहा, “इसके उलट, भारत का जम्मू-कश्मीर 2024 से स्किल डेवलपमेंट के जरिए आगे बढ़ा है, जिससे रोजगार पैदा हुए हैं और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिला है. इसके साथ ही, स्मार्ट सिटी पहल और ग्रामीण बुनियादी ढांचे ने विकास को और मजबूत किया है.”
उनकी इस बात ने PoJK में पाकिस्तान के दमन को उजागर किया और साथ ही भारत के जम्मू-कश्मीर में शांति, तरक्की और सामान्य हालात की कहानी भी पेश की.
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