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एक्टर करने से पहले मदरसे में बच्चों को पढ़ाता था ये एक्टर, 600 फिल्मों में किया काम, नत्थूलाल बन पर्दे पर मचाया धमाल | Before becoming an actor Mukri used to teach children at a madrasa he worked in 600 films and created a sensation on screen as Nathulal



बॉलीवुड के सुनहरे दौर में एक ऐसा कलाकार था जिसकी लंबाई छोटी थी, लेकिन प्रतिभा बहुत बड़ी. करीब पांच फुट के कद, दांतों के बिना मुस्कान और बेमिसाल कॉमेडी टाइमिंग वाले इस एक्टर का नाम था मोहम्मद उमर मुकरी. उन्होंने पचास साल से ज्यादा के करियर में लगभग 600 फिल्मों में काम किया. आज उन्हें ज्यादातर लोग अपनी बड़ी मूंछ और अमिताभ बच्चन के साथ की केमिस्ट्री के लिए याद करते हैं. मुकरी का जन्म 1922 में महाराष्ट्र में एक कोंकणी मुस्लिम परिवार में हुआ था. 

मुकरी ने काजी का किया काम 

पिता मदरसे में कुरान पढ़ाते थे और मां घर संभालती थीं. स्कूल के दिनों में ही उन्हें का शौक लग गया. मुंबई में भाई के पास आकर पढ़ाई के दौरान मुकरी दिलीप कुमार से मिले, जो बाद में हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक बने.

पढ़ाई के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए मुकरी ने काजी का काम शुरू किया और बच्चों को कुरान सिखाया. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सरकारी सेवा में भी रहे. फिर एक दिन मस्जिद में फिर दिलीप कुमार से मुलाकात हुई. दिलीप कुमार ने उनकी एक्टिंग की इच्छा को समझा और बॉम्बे टॉकीज के कई फिल्मकारों से मिलाया.

ऐसे में मिला एक्टिंग का मौका

मुकरी ने शुरुआत असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में की. बॉम्बे टॉकीज की मालकिन देविका रानी ने उनकी मुस्कान देखकर कहा था कि वे पर्दे के पीछे नहीं, स्क्रीन पर होने चाहिए. 1945 की फिल्म ‘प्रतिमा’ से उनका एक्टिंग करियर शुरू हुआ. इसके बाद मुकरी नियमित रूप से कास्ट होने लगे. दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर, राजेंद्र कुमार और सुनील दत्त जैसी बड़ी हस्तियों के साथ काम किया.

अमिताभ बच्चन संग दिखी जोड़ी

मुकरी सबसे यादगार भूमिकाएं आईं ‘अमर अकबर एंथनी’ में तय्यब अली और ‘शराबी’ में नथूलाल के रूप में. प्रकाशन मेहरा ने नथूलाल की भूमिका के लिए उन्हें चुना था क्योंकि वे गंभीर और कॉमिक दोनों लग सकते थे. बड़ी मूंछ इस किरदार की पहचान बन गई. 1984 की फिल्म ‘शराबी’ में अमिताभ बच्चन का डायलॉग ‘मूंछें हों तो नत्थूलाल जैसी हों’ आज भी मशहूर है. कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन ने कॉमेडी का अंदाज मुकरी को देखकर सीखा. दिलचस्प बात यह है कि असली जिंदगी में अंग्रेजी नहीं जानने वाले मुकरी स्क्रीन पर अंग्रेजी डायलॉग बड़े आत्मविश्वास से बोलते थे.

‘मदर इंडिया’, ‘कोहिनूर’, ‘बॉम्बे टू गोवा’, ‘लावारिस’ जैसी कई यादगार फिल्मों में भी मुकरी नजर आए. साल 2000 में दिल का दौरा और किडनी फेल होने से मुंबई में उनका निधन हो गया. आखिरी दिनों में दिलीप कुमार रोज अस्पताल जाते रहे. मुकरी के जाने के बाद दिलीप कुमार ने खुद उनका जनाजा उठाया.

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