
Balram Jayanti 2026: भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को हलधर, बलदेव, बलभद्र और दाऊजी जैसे नामों से पुकारा जाता है. उनके हाथ में हल और मूसल होने के कारण हलछठ का पर्व भी बलराम जी से जुड़ जाता है. इसी वजह से कई लोग हलछठ और बलराम जयंती को एक ही पर्व समझते हैं. हालांकि पंचांग की तिथि, पूजा का उद्देश्य और व्रत के नियम देखें तो दोनों में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है.
बलराम जयंती 2026 की तिथि और मुहूर्त
पंचांग अनुसार, बलराम जयंती बुधवार, 16 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. यह जन्मोत्सव भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाया जाता है.
- षष्ठी तिथि प्रारंभ: 16 सितंबर 2026 को सुबह 8:59 बजे
- षष्ठी तिथि समाप्त: 17 सितंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे
- बलराम जयंती पूजा मुहूर्त: सुबह 11:02 से दोपहर 1:30 बजे तक
- पूजा की अवधि: 2 घंटे 28 मिनट
ये समय नई दिल्ली के लिए है. अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और भौगोलिक स्थिति के कारण कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.
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बलराम जयंती पर भगवान बलराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके पंचामृत अभिषेक, वस्त्र, फूल, चंदन और सात्विक भोग अर्पित किया जाता है. गर्ग संहिता से जुड़ी बलराम जन्म कथा पढ़ने या सुनने की भी परंपरा है. ब्रज क्षेत्र के बलदेव स्थित दाऊजी मंदिर में इस दिन विशेष अभिषेक, शृंगार और उत्सव होता है.
हलछठ 2026 कब मनाया गया?
हलछठ या हलषष्ठी का व्रत 2 सितंबर 2026 को रखा गया था. इसकी षष्ठी तिथि 2 सितंबर को सुबह 6:12 बजे शुरू होकर 3 सितंबर को सुबह 4:25 बजे समाप्त हुई. यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी थी, जबकि 16 सितंबर की बलराम जयंती शुक्ल पक्ष की षष्ठी है.
हलछठ को हरछठ, ललही छठ और कमर छठ भी कहा जाता है. यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान के स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना से रखती हैं. इसमें हल, खेती और ग्रामीण जीवन से जुड़े नियम प्रमुख होते हैं.
दोनों की पूजा के नियम कैसे अलग हैं?
बलराम जयंती मुख्य रूप से भगवान बलराम का जन्मोत्सव है. इसमें अभिषेक, शृंगार, आरती, मंत्र-जप और भोग पर जोर रहता है. दूसरी ओर, हलछठ संतान की मंगलकामना से रखा जाने वाला क्षेत्रीय व्रत है.
हलछठ में कई स्थानों पर हल से जोते खेत में पैदा हुए अनाज और सब्जियां नहीं खाई जातीं. गाय के दूध तथा उससे बने पदार्थों से भी परहेज करने की परंपरा मिलती है. पसई के चावल, महुआ और भैंस के दूध से बनी चीजों का प्रयोग कुछ क्षेत्रों में किया जाता है. ये नियम स्थानीय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं.
क्या दोनों एक ही पर्व हैं?
दोनों पर्व भगवान बलराम से जुड़े हैं, लेकिन पंचांग के अनुसार इन्हें एक ही पर्व कहना पूरी तरह सही नहीं होगा. हलछठ भाद्रपद कृष्ण षष्ठी का संतान-केंद्रित व्रत है, जबकि बलराम जयंती भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर मनाया जाने वाला बलराम जन्मोत्सव है. समान देवता और ‘छठ’ नाम के कारण दोनों को अक्सर एक समझ लिया जाता है.
FAQ
1. बलराम जयंती 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार बलराम जयंती बुधवार, 16 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी.
2. बलराम जयंती की पूजा का मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली के लिए पूजा मुहूर्त सुबह 11:02 से दोपहर 1:30 बजे तक है.
3. षष्ठी तिथि कब शुरू होगी?
षष्ठी तिथि 16 सितंबर को सुबह 8:59 बजे शुरू होकर 17 सितंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी.
4. क्या बलराम जयंती और हलछठ एक ही पर्व हैं?
दोनों भगवान बलराम से जुड़े हैं, लेकिन उनकी तिथि, उद्देश्य और पूजा के नियम अलग हैं.
FAQ
1. बलराम जयंती 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार बलराम जयंती बुधवार, 16 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी.
2. बलराम जयंती की पूजा का मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली के लिए पूजा मुहूर्त सुबह 11:02 से दोपहर 1:30 बजे तक है.
3. षष्ठी तिथि कब शुरू होगी?
षष्ठी तिथि 16 सितंबर को सुबह 8:59 बजे शुरू होकर 17 सितंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी.
4. क्या बलराम जयंती और हलछठ एक ही पर्व हैं?
दोनों भगवान बलराम से जुड़े हैं, लेकिन उनकी तिथि, उद्देश्य और पूजा के नियम अलग हैं.
5. हलछठ 2026 कब मनाया गया था?
हलछठ का व्रत 2 सितंबर 2026 को रखा गया था.
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