

जब भी कृष्ण भक्ति के गीतों की बात होती है, मीरा बाई के भजनों का जिक्र जरूर आता है. कृष्ण के प्रति उनकी भक्ति और समर्पण आज भी लोगों को भावुक कर देता है. मीरा ने अपने आराध्य श्रीकृष्ण को समर्पित कई भजन लिखे, जो सदियों बाद भी भक्तों की जुबान पर हैं. इन्हीं में से एक है ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची रे’. करीब 400 साल पुराने इस भजन में मीरा की कृष्ण के प्रति ऐसी दीवानगी दिखाई देती है, जिसमें उन्हें दुनिया की परवाह नहीं है. भजन के शब्दों में प्रेम, भक्ति, समर्पण और समाज की परवाह न करने का भाव साफ नजर आता है.
भजन में छिपा है मीरा की भक्ति का गहरा भाव
‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची रे’ को मीरा बाई की कृष्ण भक्ति से जोड़कर देखा जाता है. भजन की शुरुआती पंक्तियों में मीरा अपने पैरों में घुंघरू बांधकर कृष्ण के प्रेम में नाचने की बात कहती हैं. उनके लिए कृष्ण सिर्फ भगवान नहीं, बल्कि उनके प्रियतम और जीवन का सबसे बड़ा सहारा हैं.
इस भजन में मीरा की उस बेपरवाह भक्ति की झलक मिलती है, जिसमें उन्हें समाज की बातों की कोई चिंता नहीं. लोगों ने उनकी कृष्ण भक्ति को देखकर उन्हें पागल तक कहा, लेकिन मीरा अपने रास्ते से नहीं हटीं. भजन में राणा की ओर से भेजे गए विष के प्याले का प्रसंग भी आता है. मीरा के लिए कृष्ण पर विश्वास इतना मजबूत था कि मुश्किलों के सामने भी उनका समर्पण नहीं डगमगाया.
बॉलीवुड ने भी मीरा के भजन से ली प्रेरणा
मीरा की भक्ति से जुड़े इस मशहूर बोल ने दशकों बाद बॉलीवुड में भी नया रूप लिया. साल 1982 में आई फिल्म ‘नमक हलाल’ के लोकप्रिय गाने ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी’ की शुरुआती पंक्ति इसी पारंपरिक भक्ति भाव से प्रेरित मानी जाती है. फिल्म के लिए गीतकार अनजान ने इसे एक अलग अंदाज में लिखा और किशोर कुमार ने अपनी दमदार आवाज में गाया. गाने में अमिताभ बच्चन का खास अंदाज देखने को मिला, जबकि उनके साथ स्मिता पाटिल भी नजर आईं. इसका संगीत बप्पी लाहिड़ी ने तैयार किया था.
फिल्मी वर्जन अपने अलग अंदाज की वजह से बेहद लोकप्रिय हुआ, लेकिन इसकी जड़ें मीरा की सदियों पुरानी कृष्ण भक्ति से जुड़ी हैं. यही वजह है कि जन्माष्टमी जैसे खास मौकों पर आज भी मीरा के भजनों और उनसे प्रेरित गीतों की गूंज सुनाई देती है.





