

नई दिल्ली:
साधना शिवदासानी हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने बहुत कम समय में ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसे पाना हर कलाकार के लिए आसान नहीं होता. खूबसूरती, शानदार अभिनय और अपने अलग अंदाज की वजह से साधना 1960 के दशक की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल रहीं. उनकी फिल्मों के गाने आज भी लोगों को याद हैं और उनका फैशन भी लंबे समय तक चर्चा में रहा. लेकिन, साधना की पहचान से जुड़ा एक किस्सा बालों का भी है. जिस हेयरस्टाइल को शुरुआत में उनके माथे को ढकने के लिए अपनाया गया था, वही आगे चलकर इतना मशहूर हुआ कि उसका नाम ही ‘साधना कट’ पड़ गया.
कौन थी साधना
साधना का जन्म 2 सितंबर 1941 को कराची में हुआ था. उस समय भारत का बंटवारा नहीं हुआ था. बंटवारे के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया. बचपन से ही साधना का फिल्मों में काम करने का सपना था. मुंबई आने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया में कदम रखने की कोशिश शुरू की. 1955 में वह राज कपूर की फिल्म ‘श्री 420’ में एक छोटे से रोल में नजर आई थीं. इसके बाद 1958 की सिंधी फिल्म ‘अबाना’ में उन्होंने काम किया. इसी दौरान निर्माता शशधर मुखर्जी की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने साधना को एक्टिंग की ट्रेनिंग दिलाई.
हेयर स्टाइल ने दिलाई पहचान
साधना को बतौर लीड एक्ट्रेस बड़ा मौका ‘लव इन शिमला‘ से मिला. साल 1960 में आई इस फिल्म के डायरेक्टर आर.के. नैय्यर और हीरो जॉय मुखर्जी थे. फिल्म ने साधना को रातोंरात पहचान दिला दी. इसी फिल्म से उनके करियर के साथ एक ऐसा हेयरस्टाइल भी जुड़ा, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गया. फिल्म के लिए उनकी तस्वीरें देखी गईं तो उनका माथा काफी चौड़ा नजर आ रहा था. इसे छिपाने के लिए अलग-अलग हेयरस्टाइल और विग तक आजमाए गए, लेकिन बात नहीं बनी. आखिरकार आर.के. नैय्यर ने ऑड्रे हेपबर्न से प्रेरित फ्रिंज हेयरस्टाइल आजमाने का फैसला किया.
शुरुआत में साधना भी इस हेयरस्टाइल को लेकर थोड़ी हिचकिचाई थीं. उन्हें लगता था कि किसी भारतीय लड़की पर ऐसा फ्रिंज हेयरस्टाइल शायद अच्छा नहीं लगेगा. जब उन्होंने इसे अपनाया तो नतीजा बिल्कुल उलटा निकला. माथे पर आने वाली छोटी-छोटी लटें उनके चेहरे पर इतनी अच्छी लगीं कि यही उनका सिग्नेचर स्टाइल बन गया. बाद में लोग इस हेयरकट को ‘साधना कट’ कहने लगे. लड़कियों के बीच यह हेयरस्टाइल इतना लोकप्रिय हुआ कि उस दौर में बहुत सी लड़कियां पार्लर जाकर साधना कट की मांग करने लगीं.
साधना का फिल्मी सफर
साधना ने ‘परख’, ‘हम दोनों’, ‘असली-नकली’ और ‘एक मुसाफिर एक हसीना’ जैसी फिल्मों में भी काम किया. इसके बाद ‘मेरे महबूब’, ‘राजकुमार’, ‘वो कौन थी?’, ‘आरजू’, ‘वक्त’ और ‘मेरा साया’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बड़ी स्टार बना दिया. साधना और डायरेक्टर राज खोसला की जोड़ी भी काफी चर्चित रही. ‘वो कौन थी?’, ‘मेरा साया’ और ‘अनीता’ जैसी फिल्मों में उनके रहस्यमयी किरदारों ने उन्हें ‘मिस्ट्री गर्ल’ का नाम दिया. ‘वो कौन थी?’ में उनका सफेद साड़ी वाला लुक और रहस्यमयी अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया. वहीं, उनकी फिल्म ‘मेरा साया’ और ‘अनीता’ भी हिट रही.
लुक और ड्रेसिंग सेंस ने दिलाई पहचान
साधना सिर्फ हेयरस्टाइल की वजह से ही फैशन आइकन नहीं बनीं. ‘वक्त’ में उनके फिट चूड़ीदार-कुर्ते वाले लुक ने भी खूब लोकप्रियता हासिल की. उनका पहनावा और बालों का अंदाज उस समय की युवतियों के बीच ट्रेंड बन गया था. पर्दे पर साधना जिस अंदाज में आती थीं, वह जल्द ही आम लोगों के फैशन का हिस्सा बन जाता था.
1960 के दशक के आखिर में साधना की सेहत खराब होने लगी. उन्हें हाइपरथायरॉइडिज्म की समस्या हुई और इलाज के लिए बोस्टन भी जाना पड़ा. बीमारी के कारण उनके करियर पर असर पड़ा और कुछ समय के लिए उन्होंने फिल्मों से दूरी बनाई. हालांकि, 1969 में उन्होंने ‘एक फूल दो माली’ और ‘इंतकाम’ जैसी फिल्मों से वापसी की और दोनों फिल्मों को दर्शकों ने पसंद किया.
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निर्देशन में भी आजमाया हाथ
साधना ने आगे चलकर अभिनय के साथ निर्देशन में भी हाथ आजमाया. साल 1974 में उन्होंने ‘गीता मेरा नाम’ का निर्देशन किया. इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली. उनकी आखिरी रिलीज फिल्मों में ‘उल्फत की नई मंजिलें’ शामिल है, जो 1994 में रिलीज हुई. निजी जिंदगी में साधना ने ‘लव इन शिमला’ के निर्देशक आर.के. नैय्यर से 1966 में शादी की थी. साधना को उनके योगदान के लिए 2002 में आईफा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. 24 दिसंबर 2015 को उन्हें मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में भर्ती कराया गया और 25 दिसंबर 2015 को 74 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.





