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शव भी पूरे नहीं मिल रहे, एनडीटीवी की ग्राउंड रिपोर्ट में दिख रहा नेपाल तबाही का मंजर | Nepal Bhote Koshi 743 people from 36 countries were missing 121 rescued 622 remain missing


नेपाल में बुधवार को आई बाढ़ ने कई दिल को चीरने वाले दृश्य दिखाए हैं. मिनटों में लोग बेघर और बेरोजगार हो गए. अपनों को खो दिया. मगर इस दुख से सामना सिर्फ नेपाल के लोगों का ही नहीं हुआ है. दुनिया के 36 देशों को इस बाढ़ ने गहरे जख्म दिए हैं.

नेपाल पर्यटन बोर्ड की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, भोटेकाशी में अमेरिका से लेकर रूस और भारत तक करीब 743 लोग गायब थे. इनमें नेपाल से भी ज्यादा भारत के लोग लापता थे. कुल 743 लापता लोगों में से 121 को बचा लिया गया है. अब इस इलाके में कुल 622 लोग लापता है. इस इलाके में भारत के अभी भी 98 लोग लापता हैं.

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वहीं भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों का स्वागत किया. इन तीर्थयात्रियों को नेपाल में अचानक आई बाढ़ से बचाया गया था, जिसने वहां भारी तबाही मचाई थी. इन तीर्थयात्रियों का स्वागत करने और उनसे बातचीत करने के लिए तमिलनाडु सरकार के कई मंत्री, जिनमें आधव अर्जुन और राजमोहन शामिल थे, वहां मौजूद थे. मंत्रियों ने हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम का भी दौरा किया और उनके कामकाज का जायजा लिया.

320 भारतीय नागरिक लापता

विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को बताया कि बाढ़ से प्रभावित नेपाल में बचाव और राहत कार्य जारी हैं. इस दौरान 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है और भारतीय मूल के लगभग 100 लोगों तक भी अभी तक पहुंचा नहीं जा सका है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि लापता लोगों की अलग-अलग सूचियों का मिलान करने का काम चल रहा है, इसलिए ये आंकड़े बदल सकते हैं.

हर जगह दिख रहे शव

एनडीटीवी की टीम बचाव टीम के साथ जगह-जगह नेपाल में घूम रही है. इस दौरान विभत्स तस्वीरें देखने को मिल रही हैं. कई जगह तो टुकड़ों में शव मिल रहे हैं. किसी का हाथ मिल रहा है तो किसी का पैर. असल में रेत में दबने और पानी से रिसने के कारण शरीर भी निकालते वक्त कट जा रहे हैं. एनडीटीवी को बचाव टीम ने बताया कि हम अपना बेस्ट देने की कोशिश कर रहे हैं. ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाने की कोशिश जारी है. इस बीच शवों के कारण काफी बदबू भी बाढ़ वाले इलाकों में फैल गई है. बचाव टीम को बीमारी पनपने का भी खतरा है. इसीलिए सभी मास्क लगाकर और दास्ताने पहनकर काम कर रहे हैं. 

इस बीच नेपाल में अभी भी लोगों के लिए सबसे बड़ा काम अपनों को ढूंढना और खाने-पीने का सामान इकट्ठा करना बना हुआ है. जब भी कोई शव तैरता हुआ नजर आता है तो लोगों के दिलों की धड़कनें बढ़ जाती हैं कि कहीं कोई अपना ही न हो. लापता होने पर अभी भी एक उम्मीद बनी हुई है कि हो सकता है सड़क और मोबाइल टावर्स क्षतिग्रस्त होने की वजह से उनके अपने संपर्क नहीं कर पा रहे हों. मगर दिल बार-बार कहता है कि कहीं कोई अनहोनी ना हो गई है. 

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