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बेटा हो या बेटी, 52 साल पुराना वो गाना जिसे गाकर किन्नर आज भी देते हैं बधाई, मोहम्मद रफी और महमूद की आवाज ने बनाया हिट | Mohammed Rafi and Mehmood 52 year old song Saj Rahi Gali Meri Maa sung by Kinnar Troupe offer congratulations after baby birth



Kunwara Baap Popular Song: किसी घर में बच्चे की किलकारी गूंजे और बधाई देने किन्नर पहुंच जाएं, तो माहौल अपने आप खुशनुमा हो जाता है. ढोलक की थाप, तालियों की गूंज और बधाई के बीच कुछ ऐसे गीत हैं, जो पीढ़ियां बदलने के बाद भी अपनी जगह बनाए हुए हैं. ऐसा ही एक गीत है, जिसे सुनते ही पुराने दौर की याद आ जाती है. खास बात ये है कि इस गाने में सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि रफी की आवाज और महमूद की अदाकारी का ऐसा मेल है, जो आज भी लोगों को खूब पसंद आता है.

आज भी बधाई में क्यों सुनाई देता है ये गाना? 

साल 1974 में आई फिल्म ‘कुंवारा बाप’ का गाना ‘सज रही गली मेरी मां’ आज भी किन्नरों की बधाई में सुनाई दे जाता है. मोहम्मद रफी और महमूद की आवाज में सजे इस गाने को राजेश रोशन ने संगीत दिया था. राजेश रोशन के संगीत करियर की शुरुआत भी इसी फिल्म से हुई थी. गाने की खासियत सिर्फ इसकी धुन नहीं है. इसमें एक ऐसा उत्सव और अपनापन है, जो बच्चे के जन्म या किसी खुशी के मौके से आसानी से जुड़ जाता है. यही वजह है कि करीब पांच दशक बाद भी ये गीत लोगों की यादों में बना हुआ है. गाने के वीडियो में महमूद की अदाकारी इसे और खास बना देती है. उनका अंदाज, हाव-भाव और कॉमेडी टाइमिंग गीत को सिर्फ सुनने के बजाय देखने लायक भी बनाती है. यही वजह है कि ये गाना आज भी सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म पर लोगों को पुराने दौर में ले जाता है.

सिर्फ कॉमेडी फिल्म नहीं, एक गंभीर संदेश भी था

कुंवारा बाप’ को महमूद ने निर्देशित किया था और इसमें उन्होंने मुख्य भूमिका भी निभाई थी. फिल्म में भारती, विनोद मेहरा, दक्षिण भारतीय अभिनेत्री मनोरमा और महमूद के बेटे मैकी अली भी नजर आए थे. फिल्म की कहानी चार्ली चैपलिन की चर्चित फिल्म ‘द किड’ से इंस्पायर थी. लेकिन फिल्म का मकसद सिर्फ दर्शकों को हंसाना नहीं था. इसमें पोलियो जैसी गंभीर बीमारी और उसके खिलाफ टीकाकरण को लेकर जागरूकता का संदेश दिया गया था. दरअसल महमूद के बेटे मैकी अली खुद पोलियो से पीड़ित थे. इसी व्यक्तिगत अनुभव ने महमूद को इस विषय पर फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया.

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