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गुलजार का लिखा वो स्पेशल गाना, हनी सिंह ने उठाए थे लिरिक्स पर सवाल, खुद गीतकार ने कहा- अंतरा तो समझ लें   | Gulzar written item song Beedi lyrics raised questions by Honey Singh lyricist himself said understand difference



नई दिल्ली:

गुलजार हिंदी सिनेमा के जाने माने गीतकार हैं, जिन्होंने गाने मोरा गोरा रंग लाई ले से करियर की शुरूआत की और तुझसे नाराज नहीं जिंदगी, जय हो और दिल ढूंढता है जैसे आइकॉनिक गाने बॉलीवुड को दिए. लेकिन क्या आप गुलजार के उस स्पेशल सॉन्ग के बारे में जानते हैं, जिसके लिरिक्स को लेकर काफी बवाल हुआ था. यहां तक कि सिंगर और रैपर हनी सिंह ने भी गुलजार के खिलाफ आवाज उठा दी थी. हालांकि आज 20 साल बाद यह गाना खूब पॉपुलर हैं और लोग इस गाने पर जमकर डांस करते हैं. 

गुलजार के 20 साल पुराने गाने के बोल पर हुई थी कॉन्ट्रोवर्सी

हम बात कर रहे हैं गुलजार के लिए स्पेशल गाने बिड़ी जलाइले की, जिसके बोल खुद गीतकार ने लिखे थे. वहीं बिपाशा बासु, विवेक ओबरॉय और सैफ अली खान इस गाने में नजर आए थे. फिल्म थी 2006 में रिलीज हुई ओमकारा, जिसे विशाल भारद्वाज ने कंपोज किया था और सुनिधि चौहान और सुखविंदर सिंह ने गाया था. कई लोगों ने इसे वल्गर बताया, जिसके चलते यह काफी चर्चा में भी रहा. 

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गाने के बोल कुछ इस तरह थे…

ना गिलाफ़, ना लिहाफ़
ठंडी हवा भी ख़िलाफ़, ससुरी
ना गिलाफ़, ना लिहाफ़
ठंडी हवा भी खिलाफ, ससुरी इतनी सर्दी है किसी का लिहाफ लई ले
जा पड़ोसी के चूल्हे से आग लई ले
जा पड़ोसी के चूल्हे से आग लई ले  बीड़ी जलाई ले, जिगर से पिया
जिगर मां बड़ी आग है
बीड़ी जलाई ले, जिगर से पिया 

हनी सिंह ने कसा था तंज

हनी सिंह के गानों पर काफी कॉन्ट्रोवर्सी होती रहती है. वहीं गाने के बोल पर भी कई बार सवाल उठाए गए. लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में रैपर ने सवाल उठाते हुए कहा कि गुलजार जैसे आर्टिस्ट पर क्यों सवाल नहीं उठाए गए. उन्होंने बीड़ी जलाईले गाने पर कहा, जिगर कहां होता है औरत का? जुबां पे लगा नमक इश्क का. वह महिला की जीभ की क्यों बात कर रहे हैं. मैं यह सब सुनके बड़ा हुआ हूं. सिर्फ मैं ही क्यों गलत हूं. क्यों सिर्फ हनी सिंह को टारगेट किया जाता है. 

गुलजार ने गाने को वल्गर कहने वालों को दिया था जवाब

गुलजार का एक वीडियो है, जिसमें वह कहते हैं, “लोगों को लगता है कि यह गाना बहुत गंदे बोलों वाला है. लेकिन यह सिर्फ फ्लर्टिंग या आइटम सॉन्ग नहीं है.  इसमें सामंतवाद (feudalism) और जमींदारी व्यवस्था की बात है. औरत मजदूर वर्ग की भाषा में बोल रही है. बीड़ी, तंबाकू, धुआं, पसीना, मसाले, यह कामकाजी औरत की भाषा है. इसमें गुलाब, चांदनी या इत्र जैसी अमीर कल्पनाएं नहीं हैं.  इच्छा (desire) यहां नाज़ुक नहीं, बल्कि आग की तरह जलने वाली है.” आगे उन्होंने कहा, आप जरा सी उन लाइनों को कुरेदना शुरू करे तो यह इतना सतही नहीं है, जितना आपको लग रहा है. 

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