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सतीश पूनिया हरियाणा वाला फॉर्मूला लेकर पंजाब चुनाव में उतरेंगे, बीजेपी की जीत का ‘मास्टर प्लान’ तैयार | bjp punjab election plan satish poonia haryana style micro management formula to be implemented



पंजाब का प्रभारी बनाए जाने के साथ ही बीजेपी सांसद डॉ. सतीश पूनिया ने ‘मिशन पंजाब’ के चुनावी ब्लूप्रिंट पर काम शुरू कर दिया है. पूनिया हरियाणा चुनाव के माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल को अब पंजाब में आजमाने की तैयारी में हैं. हर विधानसभा सीट की अलग टीम, छोटे-छोटे समूह, जनसंपर्क वाले नेताओं को इलाके की जिम्मेदारी, व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए दिनभर का फीडबैक और शाम को समीक्षा पूनिया के चुनावी मॉडल के ये प्रमुख हिस्से रहे हैं. लेकिन पंजाब के मिशन में सबसे अहम कड़ी राजस्थान के सीमावर्ती जिलों की टीम हो सकती है. 

राजस्थान कनेक्शन को भुनाने की तैयारी

हरियाणा चुनाव में श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के कार्यकर्ताओं ने सिरसा, आदमपुर, बालसमंद और हिसार के आसपास की सीटों पर चुनावी प्रबंधन में भूमिका निभाई थी. अब इसी मॉडल को पंजाब में दोहराने की तैयारी है. इस बार नजर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ से सटे अबोहर, फाजिल्का और आसपास के इलाकों पर है. दोनों तरफ रिश्तेदारियां हैं, सामाजिक और कारोबारी संपर्क हैं और लंबे समय से लोगों का आना-जाना है. भाजपा इन्हीं संपर्कों को चुनावी नेटवर्क में बदलना चाहती है. 

100 नेताओं-कार्यकर्ताओं की टीम तैयार

सूत्रों के मुताबिक, पूनिया ने संगठन में सक्रिय करीब 100 नेताओं और कार्यकर्ताओं की टीम तैयार की थी. ये चेहरे सामने से कम और पर्दे के पीछे संगठनात्मक मैनेजमेंट में ज्यादा सक्रिय हो सकते हैं. यानी पंजाब में भाजपा का फोकस सिर्फ बड़े नेताओं की रैलियों पर नहीं, बल्कि हर सीट का अलग प्लान, हर इलाके की अलग टीम, रोजाना फीडबैक और बूथ स्तर के माइक्रो मैनेजमेंट पर रहने वाला है.

हरियाणा वाला फॉर्मूला पंजाब में रहेगा कारगर?

सतीश पूनिया के हरियाणा चुनावी मैनेजमेंट की खासियत रही है कि उन्होंने बड़े नेताओं की सभाओं और रैलियों के साथ-साथ चुनावी रणनीति को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर काम किया. हर विधानसभा क्षेत्र को अलग-अलग इलाकों में बांटा गया और हर इलाके के लिए छोटी टीम बनाई गई. 

ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई, जिनका संबंधित क्षेत्र में व्यक्तिगत संपर्क मजबूत था. किस कार्यकर्ता की किस इलाके में पकड़ है, किसके स्थानीय लोगों से रिश्ते हैं और कौन अपने व्यक्तिगत नेटवर्क के जरिए ज्यादा लोगों तक पहुंच सकता है, इसकी पूरी लिस्टिंग की गई. उन ही नेताओं को चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया गया.

रिश्तेदारी से लेकर सामाजिक संबध वाले नेताओं को जिम्मा

मामला सिर्फ नेताओं के चयनभर का नहीं है, बल्कि पूनिया के मॉडल में जिम्मेदारी भी स्पष्ट रहती थी. किस कार्यकर्ता को किस इलाके में जाना है, किस सामाजिक समूह से संपर्क करना है, किन लोगों से मिलना है और बूथ स्तर से क्या फीडबैक लेना है, इसकी निगरानी की जाती थी. इस मॉडल में व्यक्तिगत संपर्क बेहद अहम रहा. रिश्तेदारी, कारोबार, सामाजिक संबंध और स्थानीय पहचान के जरिए लोगों तक पहुंच बनाई गई. फील्ड से मिलने वाले फीडबैक के लिए अलग-अलग टीमों के व्हाट्सप ग्रुप बनाए गए. दिनभर की गतिविधियों की जानकारी साझा होती थी और शाम को समीक्षा के बाद अगले दिन की रणनीति तय की जाती थी.

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