खबर

अगर ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का पालन नहीं करते तो काटी जाए बिजली-पानी: सुप्रीम कोर्ट | Supreme Court tough on waste management orders disconnection of electricity and water supply major violating rules 



देशभर में बढ़ते कचरे के संकट और ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी पालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ कहा है कि कचरा पैदा करना हर व्यक्ति, परिवार और संस्थान की गतिविधियों का हिस्सा है, इसलिए उसके प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल सफाई कर्मचारियों की नहीं हो सकती. अदालत ने कहा कि देश में कचरे के बढ़ते पहाड़ से निपटने के लिए नागरिकों और संस्थानों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.

बड़े कचरा उत्पादकों पर विशेष नजर

जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजरिया की पीठ ने देशभर में बड़े कचरा उत्पादकों यानी बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) की पहचान करने के निर्देश दिए हैं. इसमें बड़े मॉल, होटल, अस्पताल, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और बड़ी आवासीय सोसायटियां शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी (SCMC) को निर्देश दिया गया है कि राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से जिला कलेक्टर छह सप्ताह के भीतर ऐसे संस्थानों की पहचान करें. इन संस्थानों को ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के पालन की जानकारी दी जाएगी.

नियम नहीं माने तो होगी सख्त कार्रवाई

कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई संस्था नियमों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. इसमें पानी या बिजली की अस्थायी आपूर्ति काटना भी शामिल है. हालांकि अनुपालन प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के बाद आपूर्ति दोबारा बहाल की जा सकेगी.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हर कचरा उत्पादक को कचरे का पृथक्करण, सुरक्षित भंडारण और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका निपटान सुनिश्चित करना होगा.

स्कूल-कॉलेजों में पढ़ाया जाएगा कचरा प्रबंधन

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल और उच्च शिक्षा विभागों को भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. अदालत ने कहा है कि ठोस कचरा प्रबंधन की सैद्धांतिक और व्यावहारिक शिक्षा को पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया जाए. शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा और छात्र अपने घरों तथा समाज में जागरूकता फैलाने का काम करेंगे. कोर्ट ने कहा, “एक शिक्षित बच्चा अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को इस दिशा में प्रेरित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है.”

डिजिटल निगरानी और नदी प्रदूषण पर फोकस

अदालत ने कचरा प्रबंधन की निगरानी के लिए डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है. कचरे के ढेर की जियो-टैग्ड तस्वीरें और मासिक अनुपालन रिपोर्ट पोर्टल के माध्यम से भेजने की व्यवस्था पर बल दिया गया है. साथ ही SCMC को विशेष रूप से नगरपालिका के ठोस कचरे से नदियों में होने वाले प्रदूषण पर नजर रखने और उससे जुड़े आंकड़े अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है.

सरकारी संस्थान भी दायरे में

सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे, रक्षा विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के अनुपालन की निगरानी के निर्देश भी दिए हैं. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल समितियां और प्रवर्तन एजेंसियां बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लक्ष्य सार्वभौमिक अनुपालन और अंततः स्व-नियमन होना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन की सफलता तभी संभव है जब नागरिक और संस्थान यह सोच बदलें कि “कचरा पैदा करना मेरा अधिकार है, लेकिन उसके प्रबंधन में सहयोग करना मेरी जिम्मेदारी नहीं.”

यह भी पढ़ें- दिल्ली में GPA पर खरीदी है प्रॉपर्टी? अब कानूनी रूप से बनना चाहते हैं मालिक, तो तुरंत उठाए ये कदम




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button