

बॉलीवुड के गाने हमेशा से लोगों के जज्बातों का आईना रहे हैं. हर खुशी, हर दर्द और हर अधूरी कहानी को संगीत ने अपनी धुनों में समेटा है. कुछ गीत ऐसे होते हैं, जो बरसों बाद भी दिल के किसी कोने में दबी यादों को जगा देते हैं. उस्ताद गुलाम अली की गाई गजल ‘हम को किसके गम ने मारा’ भी ऐसी ही एक अमर पेशकश है, जो टूटे दिल, तन्हाई और अधूरे प्यार के दर्द को बयां करती है. आज भी बारिश भरी शामों और खामोश रातों में यह गजल सुनने वालों को अपनी यादों के सफर पर ले जाती है.
26 साल बाद भी कायम है गजल का जादू
‘हम को किसके गम ने मारा’ गुलाम अली की मशहूर गजलों में शुमार है. इसके बोल मसरूर अनवर ने लिखे हैं. साल 2000 के आसपास रिलीज हुई इस गजल को अब करीब 26 साल हो चुके हैं, लेकिन इसकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई. इसकी धीमी धुन और भावुक बोल सुनने वाले को सीधे बीते रिश्तों और पुरानी यादों की दुनिया में पहुंचा देते हैं. खासकर वे लोग, जिन्होंने कभी एकतरफा प्यार, जुदाई या किसी अपने को खोने का दर्द महसूस किया है, इस गजल से खुद को आसानी से जोड़ लेते हैं.
दर्द, मोहब्बत और खामोशी की कहानी
इस गजल की खासियत सिर्फ इसकी धुन नहीं, बल्कि इसके शब्द भी हैं. इसमें प्रेमी के उस दर्द को महसूस किया जा सकता है, जिसे वह दुनिया से छिपाकर अपने अंदर समेटे रहता है. गजल में शिकायत है, लेकिन बदनाम करने की चाह नहीं. मोहब्बत है, मगर उसे हासिल कर पाने की मजबूरी भी है. यही भाव इसे आम प्रेम गीतों से अलग बनाते हैं. गजल की शायरी में कई जगह ऐसा एहसास मिलता है, जहां टूटे दिल का इंसान अपनी तकलीफ को बेहद खूबसूरत शब्दों में बयां करता है.
आज भी लाखों दिलों के करीब है गजल
समय के साथ संगीत सुनने का अंदाज जरूर बदला है, लेकिन गुलाम अली की यह गजल आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में बनी हुई है. यूट्यूब पर इसे लाखों बार सुना जा चुका है और कमेंट सेक्शन में नई पीढ़ी के लोग भी इसके बोलों की तारीफ करते नजर आते हैं. कई श्रोता बताते हैं कि बचपन में बड़े-बुजुर्गों को यह गजल सुनते देखकर उन्हें समझ नहीं आता था कि इसे बार-बार क्यों बजाया जाता है, लेकिन बड़े होने के बाद इसके दर्द का मतलब समझ आया. यही किसी सदाबहार गजल की असली खूबसूरती है.





