

केंद्र सरकार ने शनिवार को देश की चार प्रमुख हाईकोर्टों में कुल 30 नए जजों की नियुक्ति की घोषणा की. कानून मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इन नियुक्तियों में 20 अधिवक्ता और 10 न्यायिक अधिकारी शामिल हैं. यह कदम लंबित मामलों के निपटारे की गति बढ़ाने और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मद्रास हाईकोर्ट को मिले सबसे ज्यादा जज
नई नियुक्तियों में सबसे अधिक 15 जज मद्रास हाईकोर्ट में नियुक्त किए गए हैं. इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट में 8 नए जजों को नियुक्ति मिली है. वहीं कर्नाटक हाईकोर्ट में 6 और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 1 नए जज की नियुक्ति की गई है. इन नियुक्तियों से संबंधित हाईकोर्टों में लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.
अधिवक्ता और न्यायिक अधिकारियों को मिला अवसर
हाईकोर्टों में नियुक्त जजों में एक बड़ा हिस्सा अधिवक्ताओं का है, जबकि कुछ नियुक्तियां निचली अदालतों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों में से की गई हैं. भारतीय न्यायिक व्यवस्था में दोनों वर्गों के लोगों को हाईकोर्ट में जज नियुक्त किए जाने का प्रावधान है.
दो साल बाद मिलती है स्थायी नियुक्ति
आमतौर पर हाईकोर्ट में नियुक्त किए जाने वाले अतिरिक्त जज (Additional Judge) करीब दो वर्ष तक इस पद पर कार्य करते हैं. इसके बाद उनके प्रदर्शन और आवश्यकता के आधार पर उन्हें स्थायी जज के रूप में नियुक्त किया जाता है. इसी कारण इन नियुक्तियों को न्यायपालिका में नई ऊर्जा और अनुभव जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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